Anmol Sandesh News Desk,फरीदकोट (पंजाब)
पंजाब के फरीदकोट जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने नहर का पानी चोरी करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 43 किसानों के खिलाफ FIR दर्ज की। हैरानी की बात यह है कि इस सूची में कुछ ऐसे किसानों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी कई साल पहले मौत हो चुकी है।मामला सामने आने के बाद किसान संगठनों ने पुलिस और विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए FIR वापस लेने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, नहर से पानी चोरी के आरोप में नहर विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 43 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।लेकिन जब FIR की जानकारी सामने आई तो पता चला कि इसमें कुछ ऐसे लोगों के नाम भी दर्ज हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। इसके बाद इलाके में चर्चा शुरू हो गई और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।
किसान संगठनों ने उठाई आवाज
किसान संगठनों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि ज्यादातर किसान अब खेतों की सिंचाई के लिए नहर के बजाय ट्यूबवेल का इस्तेमाल करते हैं।
संगठनों की मांग है कि:
- गलत तरीके से दर्ज FIR तुरंत वापस ली जाए।
- असली दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए।
- निर्दोष किसानों को परेशान न किया जाए।
किसान नेताओं का कहना है कि बिना जांच के नाम शामिल करना किसानों के साथ अन्याय है।
पुलिस ने मानी गलती
मामले पर पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि FIR नहर विभाग के कार्यकारी अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी।जांच के दौरान सामने आया कि सूची में कुछ ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी मृत्यु पहले ही हो चुकी है। पुलिस ने कहा है कि रिकॉर्ड की जांच कर आवश्यक सुधार किया जाएगा।
अब जांच पर नजर
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अब सवाल यह है कि FIR में मृत किसानों के नाम कैसे शामिल हुए और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।यह मामला सामने आने के बाद पंजाब में किसान संगठनों और प्रशासन के बीच नई बहस शुरू हो गई है।
