Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को एक और राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद टीएमसी के भीतर चल रही अंदरूनी हलचल और तेज हो गई है।सुष्मिता देव ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। हालांकि, टीएमसी के साथ उनका राजनीतिक सफर लगभग पांच वर्षों में ही समाप्त हो गया।
पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुष्मिता देव का इस्तीफा टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका है। उन्हें ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता था और पार्टी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं।उनके इस्तीफे ने ऐसे समय में पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जब टीएमसी पहले से ही कई वरिष्ठ नेताओं के असंतोष और इस्तीफों का सामना कर रही है।

कौन हैं सुष्मिता देव?
सुष्मिता देव असम की सिलचर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद रह चुकी हैं। वह लंबे समय तक कांग्रेस की सक्रिय नेता रहीं और पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं।2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गई थीं। इसके बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया था।

TMC में लगातार बढ़ रही असंतोष की आवाजें
सुष्मिता देव से पहले भी कई नेताओं ने टीएमसी से दूरी बनाई है। हाल ही में राज्यसभा सांसद और पार्टी के पूर्व चीफ व्हिप सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे।सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर कई सांसदों और नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ नेता अलग राजनीतिक रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं।
ममता बनर्जी के सामने नई चुनौती
एक सप्ताह के भीतर पार्टी से यह दूसरा बड़ा इस्तीफा माना जा रहा है। ऐसे में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी समीकरणों के बीच ममता बनर्जी के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि टीएमसी नेतृत्व सुष्मिता देव के इस्तीफे पर क्या रुख अपनाता है और पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की आवाजों को किस तरह संभालता है।
