Monday, June 22, 2026
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सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की भारत को धमकी, रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ बोले-जल सुरक्षा खतरे में पड़ी तो जंग छेड़ देंगे

Anmol Sandesh News Desk,इस्लामाबाद

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने भारत को लेकर तीखा बयान देते हुए कहा है कि यदि पाकिस्तान को अपनी जल सुरक्षा पर खतरा महसूस हुआ तो वह भारत के खिलाफ युद्ध शुरू करने तक का कदम उठा सकता है।पाकिस्तानी न्यूज चैनल ARY News को दिए एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में हस्तक्षेप कर रहा है और पानी को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पिछले एक वर्ष के दौरान इस मुद्दे पर हुए सभी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ा विवाद

भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद उस समय और गहरा गया जब अप्रैल 2025 में Pahalgam में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला किया।भारत का स्पष्ट रुख है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल करने पर विचार नहीं किया जाएगा।

गंभीर जल संकट से जूझ रहा पाकिस्तान

विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्रों में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है।

सिंध सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार—

  • नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1% पानी की कमी
  • राइस कैनाल में 38% पानी की कमी
  • दादू कैनाल में 82% पानी की कमी

पाकिस्तान के प्रमुख सिंचाई केंद्र Sukkur Barrage में भी जलस्तर लगातार घट रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

क्या है सिंधु जल संधि?

भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को लेकर लंबे समय तक विवाद चलता रहा। आखिरकार World Bank की मध्यस्थता में 19 सितंबर 1960 को कराची में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru और पाकिस्तान के राष्ट्रपति Ayub Khan के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए।इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों—सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज—के जल बंटवारे का ढांचा तय किया गया था।सिंधु नदी बेसिन करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान के लगभग 30 करोड़ लोग रहते हैं।

पाकिस्तान पर क्या पड़ सकता है असर?

विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली पर अत्यधिक निर्भर है।

  • पाकिस्तान की लगभग 90% सिंचित कृषि भूमि को पानी सिंधु नदी प्रणाली से मिलता है।
  • देश की राष्ट्रीय आय में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 23% है।
  • करीब 68% ग्रामीण आबादी की आजीविका खेती पर निर्भर है।

यदि जल उपलब्धता में कमी बनी रहती है तो कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

बिजली उत्पादन पर भी संकट

पानी की कमी का असर पाकिस्तान के प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार Mangla Dam और Tarbela Dam में जल स्तर प्रभावित होने से बिजली उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।इसका असर उद्योगों, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

बढ़ सकता है कूटनीतिक तनाव

विश्लेषकों का मानना है कि सिंधु जल संधि को लेकर बढ़ती बयानबाजी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती है। हालांकि अब तक भारत की ओर से पाकिस्तान के ताजा बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।फिलहाल दक्षिण एशिया की राजनीति में जल सुरक्षा और सिंधु जल संधि एक बार फिर प्रमुख चर्चा का विषय बन गई है।

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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