Anmol Sandesh News Desk,जम्मू
बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए बहुप्रतीक्षित अमरनाथ यात्रा 2026 शुक्रवार से विधिवत शुरू हो गई। यात्रा के पहले दिन 4,800 से अधिक श्रद्धालुओं का पहला जत्था कश्मीर पहुंच गया। यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त तक यानी 57 दिनों तक चलेगी। इस दौरान 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन करने का अनुमान है।
पहले जत्थे को उपराज्यपाल ने दिखाई हरी झंडी
यात्रा शुरू होने से पहले गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। इस जत्थे में 4,822 तीर्थयात्री शामिल थे, जिन्हें 259 वाहनों के सुरक्षा काफिले के साथ बालटाल और पहलगाम मार्ग के लिए रवाना किया गया।
दूसरा जत्था भी हुआ रवाना
शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था भी रवाना हुआ। इसमें 3,865 श्रद्धालु शामिल हैं।
- 1,735 श्रद्धालु 115 वाहनों से बालटाल बेस कैंप पहुंचे।
- 2,130 श्रद्धालु 86 वाहनों से पारंपरिक पहलगाम मार्ग की ओर रवाना हुए।
दो मार्गों से होती है अमरनाथ यात्रा
अमरनाथ यात्रा दो प्रमुख रास्तों से संपन्न होती है—
- पहलगाम (नुनवान) मार्ग – लगभग 48 किलोमीटर, पारंपरिक और अपेक्षाकृत लंबा रास्ता।
- बालटाल मार्ग – लगभग 14 किलोमीटर, छोटा लेकिन अधिक कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला मार्ग।
खराब मौसम को देखते हुए विशेष व्यवस्था
कश्मीर में लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं को दर्शन के बाद जल्द सुरक्षित स्थान पर लौटने की सलाह दी है।
यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं—
- हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ स्थापित किए गए हैं।
- दोमेल मार्ग पर चार स्थानों पर बड़ी LED स्क्रीन के जरिए मौसम की लाइव जानकारी दी जा रही है।
- बालटाल मार्ग पर 12 स्थानों पर वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं ताकि बारिश के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सके।
दोनों मार्गों पर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं
यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी व्यापक व्यवस्था की गई है।
- करीब 1,000 डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात किए गए हैं।
- बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर 100-100 बेड के अत्याधुनिक अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं।
- रास्ते में कई मेडिकल एड सेंटर, ऑक्सीजन पॉइंट और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं
मोबाइल कनेक्टिविटी
- बीएसएनएल, जियो और एयरटेल के विशेष काउंटर लगाए गए हैं।
- यहां अस्थायी पोस्टपेड सिम उपलब्ध कराए जा रहे हैं, क्योंकि यात्रा क्षेत्र में केवल पोस्टपेड सिम ही काम करते हैं।
रहने की व्यवस्था
- बालटाल बेस कैंप में 57 लंगर संचालित हैं।
- श्राइन बोर्ड की ओर से टेंट और बेड की व्यवस्था की गई है।
- लगभग 30 हजार श्रद्धालु एक साथ ठहर सकते हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने 6 जुलाई तक दोनों यात्रा मार्गों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। विशेष रूप से बालटाल मार्ग पर बरारी से रेलपथरी तक भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
अब तक 3.90 लाख से अधिक पंजीकरण
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। जिन श्रद्धालुओं ने पहले से रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, उनके लिए जम्मू में ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु इन बातों का रखें ध्यान
- मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट साथ रखें।
- आधार कार्ड, RFID कार्ड, यात्रा परमिट और पासपोर्ट साइज फोटो रखें।
- ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पानी की बोतल और आवश्यक दवाएं साथ रखें।
- यात्रा से पहले नियमित पैदल चलने और प्राणायाम जैसी एक्सरसाइज करने की सलाह दी गई है।
अमरनाथ यात्रा का ऐतिहासिक महत्व
अमरनाथ यात्रा भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक मानी जाती है।
- राजतरंगिणी में अमरनाथ का उल्लेख ‘अमरेश्वर‘ के रूप में मिलता है।
- महाकवि कल्हण ने 12वीं शताब्दी में इस तीर्थ का वर्णन किया है।
- अबुल फजल ने आइने-अकबरी में प्राकृतिक हिम शिवलिंग का उल्लेख किया।
- फ्रांसीसी यात्री फ्रांस्वा बर्नियर ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में इस पवित्र गुफा का वर्णन किया है।
- बुटा मलिक से जुड़ी लोककथा अमरनाथ गुफा की पुनर्खोज से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा मानी जाती है।
- वर्ष 2000 में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) के गठन के बाद यात्रा को आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप मिला।
इस वर्ष भी कड़ी सुरक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के बीच बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है।




