Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 16 जुलाई से लागू हो गई हैं।हालांकि राहत की बात यह है कि पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और सरकार की ओर से कीमत बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।

क्या बदला?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार—
- डीजल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स 8.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया।
- ATF (जेट फ्यूल) के एक्सपोर्ट पर टैक्स 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया।
- पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स वह विशेष कर है, जो सरकार तेल कंपनियों पर तब लगाती है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से उन्हें अतिरिक्त मुनाफा होता है। यह टैक्स सीधे आम उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाली कंपनियों पर लगाया जाता है।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ऐसे में सरकार ने तेल कंपनियों के अतिरिक्त लाभ पर नियंत्रण रखने और राजस्व संतुलित करने के लिए विंडफॉल टैक्स में संशोधन किया है।
क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
फिलहाल नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विंडफॉल टैक्स का असर एक्सपोर्ट करने वाली तेल कंपनियों पर पड़ता है। इसका घरेलू पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों से सीधा संबंध नहीं है।यानी अभी तक देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है। वहीं पेट्रोल पर टैक्स में कटौती के बाद भविष्य में राहत मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
पहले भी बदला जा चुका है टैक्स
सरकार इस साल कई बार विंडफॉल टैक्स में बदलाव कर चुकी है। मार्च में पहली बार डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष टैक्स लगाया गया था। इसके बाद मई में पेट्रोल को भी इसके दायरे में शामिल किया गया। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए टैक्स दरों में फिर संशोधन किया गया है।
आम लोगों के लिए क्या मायने?
- फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं।
- टैक्स का बोझ तेल कंपनियों पर रहेगा।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर आगे के फैसले निर्भर करेंगे।
- यदि वैश्विक कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है, तो भविष्य में सरकार नई समीक्षा कर सकती है।
