Anmol Sandesh News Desk,जबलपुर/कटनी (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी विकास परियोजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। महाकौशल से विंध्य और बुंदेलखंड तक नर्मदा का पानी पहुंचाने का 17 साल पुराना सपना जल्द पूरा होने वाला है।कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी जल सुरंग (वाटर टनल) लगभग तैयार हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के अधिकारियों के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया।

पहली बार इन जिलों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी
इस सुरंग के शुरू होने के बाद बरगी बांध का पानी पहली बार इन क्षेत्रों तक पहुंच सकेगा:
- कटनी
- मैहर
- सतना
- रीवा
- पन्ना
परियोजना से करीब:
* 1450 गांवों को लाभ मिलने का दावा
* 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा
* शुरुआती चरण में करीब 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सीधा फायदा
मिलने की उम्मीद है।
17 साल में पूरी हुई बेहद चुनौतीपूर्ण परियोजना
स्लीमनाबाद टनल का काम साल 2008 में शुरू हुआ था। शुरुआत में जो परियोजना आसान लग रही थी, वह निर्माण के दौरान कई बड़ी चुनौतियों से गुजरी।
निर्माण में इंजीनियरों को सामना करना पड़ा:
- संगमरमर की चट्टानों का
- चूना पत्थर की परतों का
- मिट्टी और विशाल बोल्डरों का
टनल खुदाई में इस्तेमाल होने वाले महंगे कटर कई बार टूटे, जिन पर करीब 67 करोड़ रुपये खर्च हुए।
गैस रिसाव और मशीन खराब होने से रुका काम
इस परियोजना के दौरान कई बार काम प्रभावित हुआ।
- साल 2013 में टनल के अंदर मीथेन गैस मिलने से करीब 4 महीने काम बंद रहा।
- साल 2016 में अमेरिका से लाई गई रॉबिन्स टनल बोरिंग मशीन खराब हो गई।
- इसके बाद जर्मनी से नई मशीन मंगाकर काम दोबारा शुरू किया गया।
पानी निकालने में खर्च हुए 200 करोड़ रुपये
टनल निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती भूजल रिसाव बना।टनल के अंदर हर मिनट करीब 18 से 20 हजार लीटर पानी आने लगा। शुरुआत में छोटे पंप लगाए गए, लेकिन बाद में पानी निकालने के लिए पंपों की क्षमता बढ़ाकर 4000 हॉर्स पावर तक करनी पड़ी।सिर्फ डी-वाटरिंग यानी पानी निकालने की प्रक्रिया पर ही 200 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए।
40 साल पुराने सपने को मिलेगी मंजिल
बरगी बांध बनने के समय ही 1980 के दशक में नर्मदा के पानी को सोन बेसिन तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।विंध्य पर्वत श्रृंखला सबसे बड़ी बाधा बनी। पहले नहर बनाने का विचार था, लेकिन तकनीकी कठिनाइयों के कारण बाद में सुरंग बनाने का फैसला लिया गया।करीब चार दशक बाद अब यह सपना पूरा होने जा रहा है।

बिना पंप के बहेगा नर्मदा का पानी
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें पानी ग्रेविटी फ्लो (प्राकृतिक ढलान) के जरिए आगे बढ़ेगा।
इसका फायदा:
* बिजली की बचत
* संचालन लागत में कमी
* लंबे समय तक बेहतर जल आपूर्ति
होगा।
यह करीब 10.14 मीटर व्यास वाली 11.95 किलोमीटर लंबी सुरंग देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जल सुरंगों में शामिल है।
किसानों और क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर परियोजना
स्लीमनाबाद जल सुरंग को मध्य प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली परियोजना माना जा रहा है। इसके शुरू होने से सूखे प्रभावित क्षेत्रों में खेती को मजबूती मिलेगी और हजारों किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।17 साल की कठिन यात्रा के बाद स्लीमनाबाद टनल अब मध्य प्रदेश के विकास की नई कहानी लिखने के लिए तैयार है।


