Anmol Sandesh News Desk, सिवनी
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच पेंच टाइगर रिजर्व और उससे लगे वन क्षेत्रों में 31 बाघों की मौत हुई है। इनमें 15 बाघों की मौत रिजर्व के भीतर, जबकि 16 बाघों की मौत रिजर्व से बाहर के वन क्षेत्रों में दर्ज की गई है।यह आंकड़ा इस ओर इशारा करता है कि बाघों के पारंपरिक आवास से बाहर निकलने के साथ उनके सामने खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं।

मौतों के पीछे क्या रहे कारण?
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अधिकांश बाघों की मौतें प्राकृतिक और जैविक कारणों से हुई हैं।
मुख्य कारण:
- बाघों के बीच आपसी संघर्ष
- प्राकृतिक कारण
- बीमारी
- बढ़ती उम्र
- वर्ष 2024 में करंट लगने से एक बाघ की मौत
- कुछ मामलों में जहर देकर और फंदा लगाकर शिकार
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे बाघ नए क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं, मानव-वन्यजीव संघर्ष, अवैध शिकार और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पेंच के कई बाघ अब दूसरे वन क्षेत्रों की ओर मूव कर रहे हैं। इससे वन्यजीव कॉरिडोर में उनकी सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। रिजर्व के बाहर पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण दुर्घटनाएं और अवैध गतिविधियों का जोखिम बढ़ जाता है।
संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले चार वर्षों में बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा पर लगभग ₹19.15 करोड़ खर्च किए गए हैं।इस राशि का उपयोग निगरानी, संरक्षण, गश्त और जागरूकता कार्यक्रमों पर किया गया है।

‘बाघ चौपाल‘ से लोगों को किया जा रहा जागरूक
वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए ‘बाघ चौपाल’ अभियान चला रहा है। इसके साथ ही टाइगर स्ट्राइक फोर्स के माध्यम से जंगलों में निगरानी भी बढ़ाई गई है।दक्षिण सामान्य वनमंडल के DFO गौरव मिश्रा ने कहा कि बाघों की सुरक्षा केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अवैध शिकार या संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देने की अपील की।वहीं उत्तर सामान्य वनमंडल के DFO महेंद्र सिंह उइके ने कहा कि बाघों का संरक्षण पर्यावरण, जैव विविधता और जल स्रोतों के संतुलन के लिए बेहद जरूरी है।पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि बाघ सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करता। वह तभी आक्रामक होता है, जब उसे अपनी या अपने शावकों की सुरक्षा को खतरा महसूस होता है।
एक नजर में
- 2021–2025 के बीच 31 बाघों की मौत
- रिजर्व के अंदर: 15
- रिजर्व के बाहर: 16
- प्रमुख कारण: प्राकृतिक मौत, आपसी संघर्ष, बीमारी, करंट, अवैध शिकार
- संरक्षण पर खर्च: ₹19.15 करोड़
- ‘बाघ चौपाल’ और टाइगर स्ट्राइक फोर्स से निगरानी तेज
