Anmol Sandesh News Desk, खंडवा, मध्य प्रदेश
सावन के पहले सोमवार पर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले स्थित विश्व प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही भगवान शिव के दर्शन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए देशभर से आए हजारों शिवभक्त और कांवड़िए मंदिर परिसर में पहुंचने लगे। पूरी तीर्थनगरी “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंज उठी।

सुबह से जारी है दर्शन और जलाभिषेक
सावन के पहले सोमवार के अवसर पर श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया। मंदिर परिसर से लेकर नर्मदा घाट तक लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है।
दो ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का विशेष महत्व
ओंकारेश्वर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव दो दिव्य स्वरूपों में विराजमान हैं।
- नर्मदा नदी के उत्तर तट पर – श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
- नर्मदा नदी के दक्षिण तट पर – श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग
धार्मिक मान्यता है कि दोनों मंदिरों के दर्शन और पूजा करने से एक ज्योतिर्लिंग के पूर्ण दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। इसी कारण सावन के महीने में यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
आज निकलेगी भगवान की भव्य शाही सवारी
सावन के प्रत्येक सोमवार की परंपरा के अनुसार आज दोपहर भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की शाही सवारी निकाली जाएगी। दोनों मंदिरों से भगवान के चल-विग्रह नर्मदा तट पर लाए जाएंगे, जहां पंचामृत अभिषेक, विशेष पूजा और नौका विहार का आयोजन होगा।इसके बाद भगवान की शाही सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से निकलेगी। श्रद्धालु मार्गभर पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करेंगे और पूरा ओंकारेश्वर शिवभक्ति के रंग में रंग जाएगा।
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और मंदिर ट्रस्ट ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रमुख व्यवस्थाओं में शामिल हैं—
- अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती
- बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन
- मेडिकल टीम और एम्बुलेंस
- स्वयंसेवकों की विशेष ड्यूटी
- यातायात और पार्किंग की अलग व्यवस्था
शिवभक्ति से सराबोर ओंकारेश्वर
सावन के पहले सोमवार पर नर्मदा तट की दिव्यता, मंदिरों की आध्यात्मिक ऊर्जा और शिवभक्तों की अटूट आस्था ने ओंकारेश्वर को पूरी तरह शिवमय बना दिया है। लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह दिन केवल पूजा का नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण और आध्यात्मिक अनुभव का भी प्रतीक है।

