Anmol Sandesh News Desk, डिंडौरी, मध्यप्रदेश
सावन के पवित्र महीने में मध्य प्रदेश के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इन्हीं में से एक है डिंडौरी जिले का प्राचीन ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर, जिसे आस्था और अनूठी मान्यताओं का केंद्र माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से व्यक्ति को आर्थिक कर्ज, मानसिक बोझ और जीवन के विभिन्न ऋणों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

हजारों साल पुराना आस्था का केंद्र
डिंडौरी जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर कुकर्रामठ गांव में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर हजारों वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सावन के पहले सोमवार पर सुबह से ही भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
कुत्ते की वफादारी से जुड़ी है अनोखी कथा
इस मंदिर का इतिहास एक बेहद भावुक लोककथा से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार, लाखा बंजारा ने आर्थिक संकट के समय अपने वफादार कुत्ते को राजा के पास गिरवी रख दिया था। इसी दौरान महल में चोरी हुई, लेकिन कुत्ते की सूझबूझ से चोरी का पूरा सामान बरामद हो गया।कुत्ते की वफादारी से प्रसन्न होकर राजा ने उसके गले में बंजारे के नाम एक पत्र बांधकर उसे वापस भेज दिया। लेकिन जब कुत्ता अपने मालिक के पास पहुंचा तो लाखा बंजारा ने यह समझ लिया कि वह महल से भाग आया है और क्रोध में आकर उसे मार दिया। बाद में पत्र पढ़कर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। गहरे पश्चाताप में उसने उसी स्थान पर भगवान शिव का मंदिर बनवाया, जो आज ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
कल्चुरी काल की धरोहर
इतिहासकारों के अनुसार, यह मंदिर कल्चुरी काल का है और यहां स्थापित लगभग तीन फीट ऊंचा प्राचीन शिवलिंग विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस मंदिर को अपने संरक्षण में लिया हुआ है।
सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़
सावन के दौरान मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और कर्ज से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
