Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर डीपफेक, CSAM (Child Sexual Abuse Material) और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कमियों को लेकर अपनी गलतियों पर खेद जताया है। कंपनी ने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसार को रोकने में चूक हुई और इसे लेकर सरकार को लिखित आश्वासन भी दिया गया।सूत्रों के अनुसार, Meta ने यह भी माना कि कुछ विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए भारी रकम खर्च की गई थी। सरकार की ओर से कंपनी को स्पष्ट किया गया कि वह केवल एक ‘इंटरमीडियरी’ की भूमिका तक सीमित नहीं है, क्योंकि उसके एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस यूज़र तक पहुंचेगा। ऐसे में IT Act के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण हर स्थिति में स्वतः लागू नहीं माना जा सकता।
सरकार के साथ अहम बैठक
Meta के Chief Global Affairs Officer Joel Kaplan ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से लगभग 30 मिनट तक मुलाकात की। इस दौरान डीपफेक, ऑनलाइन सुरक्षा, बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे पहले Meta के अधिकारियों ने MeitY के सचिव एस. कृष्णन से भी बैठक की थी।
क्या है ‘सेफ हार्बर’?
‘सेफ हार्बर’ IT Act का एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिलती है। हालांकि, यदि प्लेटफॉर्म कंटेंट के वितरण और प्रमोशन में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसकी जवाबदेही बढ़ सकती है।
