Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 6 से 8 अगस्त तक आयोजित हो रहे BRICS Culture Working Group 2026 की शुरुआत हो गई है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में 10 देशों के प्रतिनिधि सांस्कृतिक सहयोग, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सतत विकास जैसे अहम विषयों पर मंथन कर रहे हैं।बैठक में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, इंडोनेशिया, ईरान और इथियोपिया के प्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए, जबकि मिस्र ने वर्चुअल माध्यम से भागीदारी की।
भारतीय संस्कृति से रूबरू हुए विदेशी मेहमान
बैठक के बाद सभी प्रतिनिधियों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण किया, जहां उन्होंने भारत की जनजातीय विरासत, पारंपरिक आवास, लोक संस्कृति और जीवनशैली को करीब से जाना। प्रतिनिधियों ने 15 फीट ऊंचे और 1,830 किलोग्राम वजनी ‘आल-विलक्कु‘ कांस्य दीप का भी दर्शन किया, जिसे ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
कथक, नागा लोकगीत और फैशन शो ने जीता दिल
सांस्कृतिक संध्या में कथक की ‘नवरस‘, ‘काली स्तवन‘ और ‘नर्मदा अष्टपदी‘ प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। इसके बाद नागालैंड के चकेसांग नागा कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन NID मध्यप्रदेश की विशेष प्रस्तुति ‘शिखर से तट तक‘ फैशन शो के साथ हुआ, जिसमें भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता को खूबसूरती से दर्शाया गया।
विदेशी मेहमानों को मिलेगा MP के स्वाद का अनुभव
प्रतिनिधियों के लिए दाल बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा, कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन परोसे जाएंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए वेस्टर्न और ओरिएंटल डिशेज की भी विशेष व्यवस्था की गई है।
7 अगस्त को होगा भव्य BRICS Cultural Festival
7 अगस्त को आयोजित होने वाले सांस्कृतिक महोत्सव में “BRICS Peace Song – Peace is the Language of the Land”, ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां और “अमृतस्य मध्य प्रदेश” जैसी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रहेंगी। 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की संस्कृति, इतिहास, महाकाल, ओंकारेश्वर, सांची, भीमबेटका और नर्मदा की विरासत को मंच पर जीवंत करेंगे।
8 अगस्त को होगी संस्कृति मंत्रियों की बैठक
अंतिम दिन BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक में सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण, संग्रहालय, रचनात्मक उद्योग और लोगों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए साझा घोषणा-पत्र अपनाया जाएगा। इसके बाद विदेशी प्रतिनिधि यूनेस्को विश्व धरोहर सांची स्तूप का भ्रमण करेंगे और योग, ध्यान तथा लाइट एंड साउंड शो का अनुभव भी करेंगे।भोपाल एक बार फिर दुनिया के सामने भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत और ‘अतिथि देवो भवः‘ की परंपरा का भव्य प्रदर्शन कर रहा है।

