Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
संसद का मानसून सत्र इस बार लगातार हंगामे और पक्ष-विपक्ष के टकराव की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। 27 जुलाई से शुरू हुए सत्र के शुरुआती 10 दिनों में लोकसभा में केवल 188 मिनट ही प्रभावी कामकाज हो सका, जबकि करीब 7,023 मिनट कार्यवाही बाधित रहने से बर्बाद हो गए।
लोकसभा में काम कम, हंगामा ज्यादा
लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। वहीं, राज्यसभा में स्थिति कुछ बेहतर रही और करीब 1,046 मिनट कामकाज दर्ज किया गया, लेकिन वहां भी उपलब्ध समय का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका।हंगामे की वजह से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई। कुछ जरूरी विधेयकों को भी सीमित समय में पारित किया गया, जिससे संसद में सार्थक बहस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
संसद का हर मिनट कितना महंगा?
पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के मुताबिक, संसद की कार्यवाही के हर मिनट पर करीब 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में सदन का बाधित होना सिर्फ लोकतांत्रिक बहस को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि सरकारी खर्च पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।अनुमान के मुताबिक, एक दिन की कार्यवाही पर करीब 9 करोड़ रुपये तक खर्च होता है।

अब ‘केरलम’ बिल पर सबकी नजर
संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार लोकसभा में चार नए विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से जुड़ा अहम विधेयक भी शामिल है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पेश कर सकते हैं।अब मानसून सत्र के कुछ ही दिन बाकी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव खत्म होगा और महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो पाएगी? 7 हजार मिनट से ज्यादा वक्त बर्बाद… लाखों रुपये का खर्च… और अब ‘केरलम’ बिल! संसद के बचे हुए दिन बेहद अहम होने वाले हैं।
