Tuesday, August 11, 2026
Homeअन्य राज्यआधी रात तुर्की में बदला विमान,ट्रंप की जान पर था खतरा? कैटरिंग...

आधी रात तुर्की में बदला विमान,ट्रंप की जान पर था खतरा? कैटरिंग ट्रक से निकाला गया, Air Force One बना ‘डिकॉय’ !

Anmol Sandesh News Desk, तुर्की

Trump Secret Turkey Operation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुलाई में तुर्की यात्रा से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अंकारा में NATO समिट के बाद ट्रंप को ईरान से जुड़े संभावित हमले के खतरे के बीच बेहद गोपनीय तरीके से तुर्की से बाहर निकाला गया।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया को यह दिखाया गया कि ट्रंप पुराने Air Force One से ब्रिटेन के लिए रवाना हुए हैं, लेकिन पर्दे के पीछे कहानी बिल्कुल अलग थी। ट्रंप को कथित तौर पर एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे विमान तक पहुंचाया गया और फिर एक छोटे C-32A सैन्य विमान से ब्रिटेन रवाना किया गया।

तुर्की पहुंचे थे कतर के दिए नए विमान से

ट्रंप 7-8 जुलाई 2026 को NATO समिट के लिए तुर्की की राजधानी अंकारा पहुंचे थे। उनकी यात्रा के लिए कतर की ओर से दिया गया नया Boeing 747-8 इस्तेमाल किया गया था।लेकिन वापसी के समय अचानक फैसला बदल गया।ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर पुराने Air Force One से लौटने की बात कही। उस समय उन्होंने इसे सामान्य फैसला बताते हुए ‘पुराने समय के लिए’ पुराने विमान से जाने की बात कही थी। साथ ही नया विमान ब्रिटेन के RAF Mildenhall बेस भेजे जाने की बात कही गई थी।बाद में सामने आई जानकारी ने इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बना दिया।

असली ऑपरेशन एयरपोर्ट पर शुरू हुआ

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को कैमरों के सामने पुराने Air Force One पर चढ़ते हुए दिखाया गया।लेकिन इसके बाद कथित तौर पर एक बेहद गोपनीय ‘डिकॉय ऑपरेशन’ शुरू हुआ।ट्रंप को विमान से चुपचाप बाहर निकाला गया और एक कैटरिंग ट्रक के जरिए एयरपोर्ट के दूसरे हिस्से में खड़े छोटे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया।यह विमान था C-32A, जो Boeing 757 का सैन्य संस्करण है।यानी दुनिया को लगता रहा कि राष्ट्रपति Air Force One में हैं, जबकि असल में वह दूसरे विमान में सवार होकर तुर्की से निकल चुके थे।

पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी

इस ऑपरेशन का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह था कि कथित तौर पर वहां मौजूद कई पत्रकारों और कुछ व्हाइट हाउस कर्मचारियों को भी वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं थी।रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के पर्दे बंद रखने को कहा गया। इससे बाहर से यह पता लगाना मुश्किल था कि राष्ट्रपति वास्तव में किस विमान में मौजूद हैं।पुराना Air Force One बाद में बतौर डिकॉय इस्तेमाल हुआ, जबकि ट्रंप का वास्तविक विमान अलग रास्ते से ब्रिटेन की ओर रवाना हुआ। दोनों विमानों के ब्रिटेन पहुंचने के समय में भी अंतर बताया गया है।

आखिर ईरान का नाम क्यों सामने आया?

इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी वजह कथित तौर पर ईरान से मिलने वाला खतरा बताया जा रहा है।CBS News ने जुलाई में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया था कि ट्रंप के खिलाफ ईरान और उसके सहयोगी समूहों से जुड़ा एक विश्वसनीय खतरा सामने आया था। रिपोर्ट में विमान को निशाना बनाए जाने की आशंका की बात भी कही गई थी।इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप के विमान को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती।कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि इजरायल की ओर से अमेरिकी अधिकारियों के साथ ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की गई थी। हालांकि, इस दावे और कथित साजिश की पूरी स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।

नए कतर वाले विमान पर क्यों उठे सवाल?

इस पूरे मामले ने कतर से मिले नए Boeing 747-8 को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।रिपोर्टों के अनुसार, यह विमान राष्ट्रपति की यात्रा के लिए तेजी से तैयार और रेट्रोफिट किया गया था, लेकिन पुराने Air Force One में मौजूद कुछ उन्नत सुरक्षा और रक्षा प्रणालियों को लेकर इसकी तुलना में सवाल उठे हैं।हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि कतर से मिला विमान राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूरा करता है।यानी एक तरफ सरकार नए विमान को सुरक्षित बताती रही, दूसरी तरफ ट्रंप को पुराने विमान और फिर छोटे सैन्य विमान के जरिए तुर्की से निकालने की खबर ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

पूरा ऑपरेशन इतना गुप्त क्यों रखा गया?

किसी राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सबसे अहम चीज होती है—उसकी वास्तविक लोकेशन को सार्वजनिक न होने देना।अगर किसी संभावित हमलावर को यह पता चल जाए कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं, किस रास्ते से जा रहे हैं और कब उड़ान भरेंगे, तो खतरा बढ़ सकता है।इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां कभी-कभी डिकॉय, वैकल्पिक विमान और गुप्त रूट जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल करती हैं।ट्रंप के मामले में भी कथित तौर पर यही रणनीति अपनाई गई—एक विमान को सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति का विमान दिखाया गया, जबकि ट्रंप को दूसरे सैन्य विमान से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

क्या ट्रंप सचमुच ईरानी हमले के निशाने पर थे?

यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल है।अमेरिकी अधिकारियों ने ‘विश्वसनीय खतरे’ की बात कही है और जुलाई में भी ट्रंप के विमान बदलने को ईरान से जुड़े खतरे से जोड़कर रिपोर्टें सामने आई थीं। लेकिन किसी सार्वजनिक स्रोत में यह पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है कि ईरान ने वास्तव में ट्रंप के विमान पर हमला करने की अंतिम योजना बनाई थी।इसलिए फिलहाल इसे एक गंभीर सुरक्षा खतरे के आधार पर चलाया गया गोपनीय ऑपरेशन कहना ज्यादा सही होगा, न कि यह दावा करना कि ट्रंप पर हमला निश्चित रूप से होने वाला था।

क्या आगे ट्रंप कतर वाला विमान इस्तेमाल करेंगे?

यह सवाल भी अब महत्वपूर्ण हो गया है।कतर द्वारा दिया गया विमान करोड़ों डॉलर की लागत से राष्ट्रपति की यात्रा के लिए तैयार किया गया है। लेकिन तुर्की की घटना के बाद उसकी सुरक्षा क्षमताओं और पुराने Air Force One की तुलना को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यह साफ है कि तुर्की से निकलते समय ट्रंप ने नए कतर वाले विमान पर निर्भर रहने के बजाय पुराने Air Force One और फिर एक छोटे सैन्य विमान का इस्तेमाल किया।

एक राष्ट्रपति, तीन विमान और एक सीक्रेट मिशन!

तुर्की से ट्रंप की वापसी की कहानी अब किसी जासूसी फिल्म से कम नहीं लग रही—

पहले नया कतर वाला Boeing 747-8,
फिर कैमरों के सामने पुराना Air Force One,
और आखिर में कैटरिंग ट्रक से C-32A सैन्य विमान तक गुप्त ट्रांसफर।

अगर रिपोर्टों में सामने आया घटनाक्रम सही है, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए किए गए सबसे असाधारण गुप्त ऑपरेशनों में से एक माना जा सकता है।हालांकि, ईरान से जुड़ी कथित साजिश की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular