Anmol Sandesh News Desk, इंदौर
मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से पर तेजी से काम चल रहा है। परियोजना के तहत बनाई जा रही करीब 2.95 किलोमीटर लंबी सुरंग की लाइनिंग का काम पूरा कर लिया गया है।अब सुरंग के भीतर ट्रैक बिछाने, ड्रेनेज, PCC और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी कामों को तेज किया जा रहा है।पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के अनुसार, सुरंग के भीतर कई काम एक साथ चल रहे हैं, ताकि परियोजना को जल्द से जल्द आगे बढ़ाया जा सके।
1216 मीटर बैलास्टलेस ट्रैक तैयार
सुरंग के भीतर आधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक का निर्माण जारी है।अब तक करीब 1216 मीटर ट्रैक तैयार किया जा चुका है, जबकि लगभग 810 मीटर हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम प्रगति पर है।बैलास्टलेस ट्रैक में पारंपरिक गिट्टी की जगह कंक्रीट आधारित संरचना का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ट्रैक की स्थिरता और रखरखाव में मदद मिलती है।
PCC की अलग-अलग परतों पर काम
सुरंग के अंदर ट्रैक को मजबूत और सुरक्षित आधार देने के लिए PCC यानी Plain Cement Concrete का काम भी तेजी से किया जा रहा है।
अब तक—
* 1470 मीटर फाइनल PCC लेयर पूरी
* 2007 मीटर पहली PCC लेयर पूरी
* 740 मीटर हिस्से में PCC का काम जारी
रेलवे के मुताबिक सुरंग के सिविल वर्क को ट्रैक निर्माण के साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
पानी निकासी के लिए मजबूत ड्रेनेज सिस्टम
सुरंग के अंदर पानी जमा होना रेल संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए यहां विशेष ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जा रहा है।
सुरंग के दोनों ओर—
➡ साइड ड्रेन
➡ इनवर्ट ड्रेन
➡ अन्य जल निकासी संरचनाएं
तैयार की जा रही हैं और इनका बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है।इसके अलावा कट एंड कवर सेक्शन में ओवरट रिइनफोर्समेंट और लाइनिंग का काम भी पूरा किया जा चुका है। अब ड्रेनेज और बैकफिलिंग से जुड़े शेष कार्यों को पूरा किया जा रहा है।
आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा पर भी फोकस
सुरंग के निर्माण में सिर्फ ट्रैक पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
सुरंग में—
* रिफ्यूज निच
* रेस्क्यू शाफ्ट
* वेंटिलेशन डक्ट
* एग्जॉस्ट फैन
जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।इनका उद्देश्य आपात स्थिति में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को सुरक्षित निकासी में मदद करना तथा सुरंग के भीतर हवा का उचित प्रवाह बनाए रखना है।खासकर किसी आपात स्थिति में धुआं जमा होने पर एग्जॉस्ट सिस्टम उसे बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आधुनिक मशीनों से तेज हो रहा निर्माण
पश्चिम रेलवे का निर्माण विभाग सुरंग के बाकी सिविल कार्यों को जल्द पूरा करने के लिए आधुनिक मशीनरी और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है।सबसे खास बात यह है कि ट्रैक, PCC, ड्रेनेज और अन्य सिविल कार्यों को अलग-अलग चरणों में रोकने के बजाय कई काम समानांतर रूप से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।इससे निर्माण की गति बढ़ाने में मदद मिल रही है।
इंदौर-दाहोद लाइन क्यों है महत्वपूर्ण ?
इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन सिर्फ एक रेल परियोजना नहीं है, बल्कि इसे मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच बेहतर रेल संपर्क के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद—
इंदौर ↔ धार क्षेत्र ↔ झाबुआ क्षेत्र ↔ दाहोद
के बीच रेल कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।इससे यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन को भी बेहतर रेल नेटवर्क मिल सकता है।
व्यापार और उद्योग को मिल सकता है फायदा
नई रेल लाइन से इंदौर और पश्चिमी मध्य प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों को गुजरात के औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
इससे—
* माल ढुलाई आसान हो सकती है
* यात्रा का समय कम करने में मदद मिल सकती है
* व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है
* औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिल सकती है
* क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है
यानी परियोजना पूरी होने के बाद इसका असर सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
अब सुरंग निर्माण के बाद अगला फोकस
2.95 KM लंबी सुरंग की लाइनिंग पूरी होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब रेलवे का फोकस सुरंग के अंदर ट्रैक, PCC, ड्रेनेज, वेंटिलेशन और सुरक्षा से जुड़े बाकी कामों को पूरा करने पर है।
एक नजर में बड़ी उपलब्धियां
* सुरंग की लंबाई: करीब 2.95 KM
* बैलास्टलेस ट्रैक तैयार: 1216 मीटर
* ट्रैक निर्माण जारी: 810 मीटर
* फाइनल PCC: 1470 मीटर
* पहली PCC लेयर: 2007 मीटर
* ड्रेनेज सिस्टम: निर्माण जारी
* रेस्क्यू और वेंटिलेशन: काम जारी
इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के इस महत्वपूर्ण सुरंग सेक्शन में निर्माण की रफ्तार बढ़ने से अब नजर इस बात पर है कि बाकी कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं और यह नई रेल कनेक्टिविटी कब पूरी तरह जमीन पर उतरती है।
