Anmol Sandesh News Desk, भोपाल/बालाघाट
मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा जनजाति के बच्चों की मौत का मामला अब मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जनप्रतिनिधियों को प्रभावित परिवारों से मिलने और स्थानीय स्तर पर हुई संभावित लापरवाही की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।सोमवार 23 अगस्त को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के विधायकों और सांसदों के साथ करीब चार घंटे तक बैठक की। बैठक के बाद रात करीब 8 बजे रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया।बैठक में आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं, स्वास्थ्य व्यवस्था और विकास योजनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को भी प्रमुखता से उठाया गया।
पीड़ित परिवारों से मिलेंगे जनप्रतिनिधि
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बालाघाट जाकर मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात करें और उनके प्रति संवेदना व्यक्त करें। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था में हुई संभावित लापरवाही, बच्चों की मौत के कारणों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की स्थिति की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।इस कदम के बाद माना जा रहा है कि सरकार अब यह पता लगाने पर भी फोकस कर रही है कि प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन हुआ।
बालाघाट मामले में पहले भी हुई कार्रवाई
बालाघाट में बैगा जनजाति के कई बच्चों की मौत के बाद मामला काफी गंभीर हो गया था। घटनाक्रम के बाद मलेरिया और टीकाकरण से जुड़े अधिकारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।वहीं, मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी मछुरदा गांव का दौरा किया था और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी। बच्चों की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से अलग-अलग स्तर पर जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया भी सामने आई।
बच्चों की मौत के कारणों पर क्या सामने आया?
मामले में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार बच्चों की मौत के पीछे मीजल्स (खसरा), मलेरिया, टीकाकरण से जुड़ी कमी और कुपोषण जैसे कारणों की चर्चा हुई है।ICMR से जुड़ी रिपोर्ट में भी मीजल्स को महत्वपूर्ण कारण के तौर पर सामने रखे जाने की बात कही गई है। हालांकि, पूरे मामले में अलग-अलग स्वास्थ्य कारणों और स्थानीय परिस्थितियों की भूमिका की जांच की जा रही है।यही वजह है कि सरकार अब स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर विस्तृत जानकारी जुटाना चाहती है।
सिकल सेल एनीमिया पर भी हुआ मंथन
मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में सिर्फ बालाघाट का मुद्दा ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के बढ़ते मामलों को लेकर भी चर्चा हुई।मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय करें।आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती है। ऐसे में सरकार की ओर से जागरूकता, स्क्रीनिंग और इलाज की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर भी चर्चा
करीब चार घंटे चली बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा की गई।मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं, विकास कार्यों की प्रगति और योजनाओं के लाभ को लेकर फीडबैक लिया।बैठक का मुख्य फोकस आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, विकास और सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने पर रहा।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख नेता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से:
- नागर सिंह चौहान
- सांसद अनिता नागर
- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर
- अंतर सिंह आर्य
- अन्य अनुसूचित जनजाति वर्ग के सांसद एवं विधायक
शामिल रहे।
अब आगे क्या होगा?
बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले में अब जनप्रतिनिधि प्रभावित परिवारों से मिलेंगे। इसके बाद स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था, संभावित लापरवाही और बच्चों की मौत से जुड़े कारणों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को लेकर निर्णय ले सकती है।
