Tuesday, September 1, 2026
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बालाघाट में बाघों का बढ़ता खौफ! 6 महीने में 6 लोगों की मौत, विधायक मधु भगत ने CM मोहन यादव से मांगी सुरक्षा

Anmol Sandesh News Desk, बालाघाट

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच बढ़ता टकराव अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। जंगल से लगे गांवों और कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में बाघों की लगातार आवाजाही और ग्रामीणों पर हमलों ने लोगों में दहशत बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 से अब तक करीब छह महीने में बाघों के हमलों से 6 लोगों की मौत और 2 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं। लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए कांग्रेस विधायक मधु भगत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। विधायक ने ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने पर जोर दिया है।

अगस्त में सामने आईं कई घटनाएं

बालाघाट में अगस्त महीने के दौरान मानव-बाघ संघर्ष की कई घटनाओं ने प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ाई। जानकारी के अनुसार 2 अगस्त की रात कान्हा बफर क्षेत्र के पर्रापुर गांव में बाघ के घर में घुसने की घटना सामने आई, जिसमें एक महिला की जान चली गई। इसके बाद 7 अगस्त को मालखेड़ी क्षेत्र में किसान राजकुमार परते पर बाघ ने हमला किया। वहीं 9 अगस्त को खैरलांजी क्षेत्र के पांडरवानी-सतीटोला में भी बाघ के हमले में एक किसान की मौत की जानकारी सामने आई। इन घटनाओं के बाद जंगल से सटे गांवों में शाम के बाद ग्रामीणों की आवाजाही को लेकर डर बढ़ गया है।

18 अगस्त की घटना ने फिर बढ़ाई चिंता

मानव-बाघ संघर्ष की एक और घटना 18 अगस्त को कान्हा के बफर जोन क्षेत्र के करेली गांव में सामने आई। यहां संतोष मेश्राम नामक युवक पर बाघ ने हमला कर दिया। लगातार घटनाओं के कारण ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के आसपास काम करने वाले किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर उन इलाकों में स्थिति ज्यादा संवेदनशील है जहां गांव सीधे जंगल की सीमा से जुड़े हुए हैं।

बफर जोन से जुड़े 21 गांव, बाघों की मौजूदगी

जानकारी के मुताबिक कान्हा पार्क के बफर क्षेत्र से करीब 21 गांव जंगल से जुड़े हुए हैं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में बाघों की मौजूदगी बताई जाती है। जंगल का क्षेत्रफल और ग्रामीण आबादी एक-दूसरे के करीब होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही अक्सर इंसानी इलाकों तक पहुंच जाती है। यही स्थिति कई बार संघर्ष का कारण बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल बाघों को पकड़कर दूसरे स्थान पर भेजना स्थायी समाधान नहीं है। जंगल में पर्याप्त पानी और प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता, सुरक्षित कॉरिडोर और गांवों की निगरानी जैसे उपायों पर भी एक साथ काम करना जरूरी है।

विधायक मधु भगत ने CM के सामने रखीं मांगें

बढ़ती घटनाओं को लेकर कांग्रेस विधायक मधु भगत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर ग्रामीणों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। विधायक ने प्रभावित गांवों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग करते हुए कई सुझाव रखे। इनमें—

  • जंगल से लगे संवेदनशील इलाकों में मजबूत सुरक्षा बाड़ लगाना।
  • गांवों और रास्तों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना।
  • संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की लगातार पेट्रोलिंग बढ़ाना।
  • बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करना।
  • ग्रामीणों को बाघ की मौजूदगी की स्थिति में बचाव और सुरक्षित व्यवहार का प्रशिक्षण देना
  • जंगल में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त पानी और प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराना।

विधायक का कहना है कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे बाघों की गतिविधियों की जानकारी समय रहते मिल सके।

सिर्फ बाघ नहीं, इंसानों की सुरक्षा भी चुनौती

बालाघाट का बड़ा हिस्सा जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यहां बाघों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ जंगल की सीमा से लगे गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। मानव-बाघ संघर्ष का समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें ग्रामीणों की जान की सुरक्षा और बाघों का संरक्षण दोनों साथ-साथ चलें। इसके लिए वन विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

अब सवाल व्यवस्था का है

लगातार हो रही घटनाओं के बाद बालाघाट के ग्रामीणों के सामने बड़ा सवाल यही है कि जंगल से निकलकर गांवों तक पहुंच रहे बाघों की गतिविधियों पर कितनी प्रभावी निगरानी हो रही है? बाघों का संरक्षण जरूरी है, लेकिन जंगल की सीमा पर बसे लोगों को सुरक्षित माहौल देना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब ग्रामीणों की नजर मुख्यमंत्री और वन विभाग की ओर है कि बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष को रोकने के लिए तात्कालिक राहत के साथ स्थायी और वैज्ञानिक समाधान कब जमीन पर उतरता है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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