Anmol Sandesh News Desk, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य लाल बिहारी यादव के एक बयान ने सियासी माहौल गरमा दिया है। आजमगढ़ में शिक्षकों की एक बैठक के दौरान दिए गए बयान में उन्होंने कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जिसे उम्मीदवार बनाकर भेजें, उसके पक्ष में मतदान करना चाहिए। इसी बात को समझाने के लिए उन्होंने एक विवादित उदाहरण देते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव किसी कुत्ते के गले में घंटी बांधकर भी भेज दें, तो कार्यकर्ताओं को उसी उम्मीदवार को वोट देना चाहिए। बयान सामने आने के बाद भाजपा ने सपा पर हमला बोल दिया है और इसे मतदाताओं के विवेक तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान बताया है।
आजमगढ़ की बैठक में क्या हुआ?
जानकारी के मुताबिक आजमगढ़ में शिक्षकों की एक बैठक आयोजित की गई थी। इसमें सपा सांसद धर्मेंद्र यादव समेत पार्टी के कई नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। बैठक का मकसद आगामी चुनाव को लेकर संगठन को मजबूत करना और शिक्षकों तथा पार्टी समर्थकों के बीच संवाद बढ़ाना बताया गया। इसी दौरान सपा एमएलसी लाल बिहारी यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनाव में पार्टी के घोषित उम्मीदवार के समर्थन में एकजुट होकर काम करने की अपील की। इसी दौरान उन्होंने उम्मीदवार चयन और पार्टी नेतृत्व के फैसले को लेकर उक्त उदाहरण दिया, जिसके बाद उनका बयान चर्चा में आ गया।
लाल बिहारी यादव ने क्या कहा?
लाल बिहारी यादव ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाकर भेजते हैं, तो कार्यकर्ताओं को उसके पक्ष में पूरी मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने अपनी बात को जोर देने के लिए विवादित उदाहरण दिया और कहा कि यदि अखिलेश यादव किसी कुत्ते के गले में घंटी बांधकर भी उम्मीदवार बनाकर भेज दें, तो कार्यकर्ताओं को उसी के पक्ष में वोट देना चाहिए। बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। भाजपा ने इसी बयान को लेकर समाजवादी पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
BJP ने बोला हमला
भाजपा ने सपा एमएलसी के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेता जयनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता अपने विवेक, पसंद और मुद्दों के आधार पर अपने प्रतिनिधि का चुनाव करता है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि किसी पार्टी नेता द्वारा यह कहना कि पार्टी प्रमुख जिसे उम्मीदवार बनाएं, जनता को उसी के पक्ष में वोट करना चाहिए, लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सपा एमएलसी से अपने बयान पर विचार करने और जनता से माफी मांगने की मांग भी की।
‘पार्टी अनुशासन’ बनाम ‘मतदाता का विवेक’
लाल बिहारी यादव के बयान ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में पार्टी अनुशासन और मतदाता की स्वतंत्र पसंद को लेकर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं से घोषित उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार और मतदान की अपील करते हैं। लेकिन अंतिम फैसला मतदाता अपने विवेक से करता है। यही वजह है कि नेताओं के ऐसे बयान अक्सर राजनीतिक विवाद का कारण बन जाते हैं।
चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर तेज
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, भाजपा और समाजवादी पार्टी समेत तमाम राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। इसी के साथ नेताओं के बयान भी चुनावी माहौल को गर्म कर रहे हैं। AI वीडियो विवाद के बाद अब सपा एमएलसी के इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू कर दी है।
अब बयान बना सियासी हथियार
लाल बिहारी यादव के बयान को भाजपा जहां मतदाताओं का अपमान बता रही है, वहीं सपा के नजरिए से इसे पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन और नेतृत्व के फैसले के साथ मजबूती से खड़े रहने की अपील के तौर पर देखा जा सकता है। फिलहाल विवादित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है और चुनाव से पहले यह मामला भाजपा बनाम सपा की राजनीतिक बयानबाजी का नया मुद्दा बन गया है।
