Wednesday, September 2, 2026
Homeअन्य राज्यनेपाल में जलप्रलय से तबाही,955 मौतें, 4,471 लापता,हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों...

नेपाल में जलप्रलय से तबाही,955 मौतें, 4,471 लापता,हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश तेज

Anmol Sandesh News Desk, काठमांडू

नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल के साथ तिब्बत में भी जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है। 31 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल में 939 लोगों की मौत और 3,925 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में 16 मौतें और 546 लोग लापता बताए गए हैं। इस तरह दोनों क्षेत्रों में कुल मौतों का आंकड़ा 955 और लापता लोगों की संख्या 4,471 तक पहुंच गई है। आपदा के बाद सबसे बड़ी चुनौती अब उन लोगों तक पहुंचना है जो बाढ़, मिट्टी और चट्टानों के मलबे के बीच फंसे हुए हैं। खासकर हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालना राहत एजेंसियों के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।

हाइड्रोपावर सुरंगों में जिंदगी की तलाश

नेपाल के प्रभावित इलाकों में कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को बाढ़ और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सोमवार को उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 639 हाइड्रोपावर परियोजना कर्मी अभी लापता बताए गए। कई सुरंगों के प्रवेश द्वार मिट्टी, पत्थरों और पानी से बंद हो गए हैं। रेस्क्यू टीमों को सुरंगों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनरी, ड्रोन, सर्चलाइट और नियंत्रित विस्फोटों की मदद लेनी पड़ रही है। सेना के इंजीनियर मलबा हटाकर अंदर तक पहुंचने का रास्ता बनाने में जुटे हैं। ऊपरी त्रिशूली और अन्य हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाल के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें भी अभियान में मदद कर रही हैं।

20 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में

नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 20 हजार से ज्यादा जवान प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। कई इलाकों में सड़कें और पुल बह जाने के कारण जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में हेलिकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। रेडियो नेपाल के मुताबिक अब तक हजारों लोगों को बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।

तिब्बत में भी भारी तबाही

इस प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल-चीन सीमा पार तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में भी हुआ है। चीन की ओर से 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की पुष्टि की गई है। चीन ने भी 2,100 से ज्यादा बचावकर्मियों को प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया है। सीमा क्षेत्र में सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त होने से राहत पहुंचाने में मुश्किलें बनी हुई हैं।

सड़कों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान

बाढ़ की तेज धारा अपने साथ पानी के अलावा चट्टानें, मिट्टी और मलबा लेकर आई, जिससे कई गांवों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। सड़कें और पुल टूटने से कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है। हाइड्रोपावर सेक्टर पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ग्लेशियर टूटने से आई तबाही

अधिकारियों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार यह विनाशकारी बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ, चट्टान और मलबे के अचानक बहाव से जुड़ी है, जिसे ग्लेशियर के टूटने या उसके ढहने की घटना से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद तेज बहाव ने भोटेकोशी और अन्य नदी क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई।

90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

रेड क्रॉस के अनुमान के मुताबिक आपदा से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में हैं। कई स्थानों पर शवों की पहचान और सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। बाढ़ के बाद अस्पतालों और स्थानीय प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने का अभियान जारी है।

रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती

बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी मुश्किल मलबे से भरी सुरंगें, खराब मौसम, टूटे सड़क संपर्क और लगातार बदलती नदी की स्थिति है। सुरंगों में पानी और मलबा भर जाने के कारण अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना बेहद जोखिम भरा है। फिर भी राहत और बचाव टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। अब प्राथमिकता उन हजारों लोगों का पता लगाना है जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।

नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती

यह आपदा सिर्फ जान-माल के नुकसान तक सीमित नहीं है। इसने नेपाल के सड़क नेटवर्क, बिजली परियोजनाओं और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को भी बड़ा झटका दिया है। अब सरकार के सामने एक तरफ लापता लोगों की तलाश और राहत पहुंचाने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ आने वाले समय में ऐसी हिमालयी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर चेतावनी प्रणाली और मजबूत आपदा-रोधी ढांचे की जरूरत भी सामने आ गई है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular