Wednesday, September 2, 2026
Homeअन्य राज्यUS Iran War: ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले, खाड़ी...

US Iran War: ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले, खाड़ी में बढ़ा युद्ध का खतरा

Anmol Sandesh News Desk, वॉशिंगटन डीसी/तेहरान

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरान में नए हवाई हमलों के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस ताजा टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है और एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका फिर गहराने लगी है। यह हालिया सैन्य आदान-प्रदान जुलाई के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सबसे गंभीर टकरावों में से एक बताया जा रहा है। दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच अब सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए हमले

अमेरिकी सेना के अनुसार, ताजा अभियान में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक हमलों में ईरान की एयर डिफेंस व्यवस्था, रडार, संचार नेटवर्क, समुद्री सैन्य क्षमताओं और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने से संबंधित ढांचे को निशाना बनाया गया। अमेरिकी कार्रवाई के बाद तेहरान ने साफ संकेत दिया कि वह हमलों का जवाब देगा। इसके बाद बुधवार तड़के ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं।

जॉर्डन में 13 मिसाइलें, 10 को हवा में रोका गया

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। इनमें प्रिंस हसन एयरबेस और अमेरिकी मरीन बेस का नाम सामने आया है। जॉर्डन की सेना के मुताबिक उसकी एयर डिफेंस ने देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई 13 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 10 को रोक दिया, जबकि बाकी तीन दूरदराज के इलाकों में गिरीं। जॉर्डन ने इस हमले में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की है।

बहरीन और कुवैत में भी अलर्ट

ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी हितों को निशाना बनाने का दावा किया है। बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के आसपास हमलों के बाद सुरक्षा अलर्ट बढ़ाया गया। कुवैत ने भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से निपटने की पुष्टि की है। शुरुआती जानकारी के अनुसार कुवैत में हमलों से किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई। इराक के एरबिल क्षेत्र में भी अमेरिकी ठिकानों और हितों को निशाना बनाने की ईरान की ओर से जानकारी दी गई है। हालांकि इन दावों से जुड़ी क्षति के सभी विवरण स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुए हैं।

होर्मुज बना सबसे बड़ा तनाव का केंद्र

इस पूरे संघर्ष का सबसे संवेदनशील मोर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लंबे समय तक सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में बाधा आने से दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को होर्मुज से केवल चार कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि इससे एक दिन पहले यह संख्या 10 थी और पिछले 10 दिनों का औसत करीब 13 जहाज प्रतिदिन रहा था। हालांकि जहाजों के ट्रांसपोंडर बंद रहने के कारण ये आंकड़े बदल सकते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इस संघर्ष का असर दिखाई दे रहा है।

कच्चा तेल 95 डॉलर के पार

अमेरिका-ईरान टकराव बढ़ने के साथ तेल बाजार में भी तेजी आई है। बुधवार शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 95.52 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI भी 91 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। मंगलवार को दोनों प्रमुख तेल वायदा कीमतों में 4 डॉलर से अधिक की तेजी आई थी। अगर होर्मुज में समुद्री यातायात लंबे समय तक प्रभावित होता है तो तेल, गैस और समुद्री परिवहन की लागत पर और दबाव पड़ सकता है।

नागरिकों की सुरक्षा पर भी चिंता

ईरान की ओर से दावा किया गया है कि अमेरिकी हमलों में एक शादी समारोह वाला स्थान भी प्रभावित हुआ और इसमें नागरिक हताहत हुए। ईरानी अधिकारियों ने मौतों और घायलों की जानकारी दी है। अमेरिकी सेना ने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है और कहा है कि उसका अभियान सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में अभी पूरी तरह नहीं हुई है। इससे संघर्ष के मानवीय असर को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।

ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के तेवर सख्त

सैन्य कार्रवाई के साथ दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाए रखने के संकेत दिए हैं, जबकि ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी हमलों का जवाब जारी रखने की चेतावनी दी है। ऐसे में कूटनीतिक समाधान की संभावना और सैन्य टकराव के विस्तार—दोनों पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

क्या क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब दोनों देशों की सीमा से बाहर निकलकर पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण किसी भी नए हमले का दायरा तेजी से बढ़ सकता है। दूसरी ओर, होर्मुज में तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद तेजी से बदल रही है। मिसाइल हमले, ड्रोन कार्रवाई, सैन्य जवाब और होर्मुज में घटती जहाजों की आवाजाही ने पश्चिम एशिया के संकट को एक बार फिर वैश्विक चिंता में बदल दिया है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular