Anmol Sandesh News Desk, इंदौर
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 12 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम अब तय तारीख पर नहीं होगा। कार्यक्रम स्थल की अनुमति को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद के बीच कांग्रेस ने कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ाकर 19 सितंबर कर दी है। पार्टी की ओर से पहले कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम को प्रमुख स्थल के तौर पर चुना गया था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण अब आयोजन की नई जगह तलाशनी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस रीजनल पार्क के सामने स्थित आयोजन स्थल पर कार्यक्रम कराने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस स्थल को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। तारीख बदलने के बाद कांग्रेस को आयोजन की तैयारियों और व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त समय भी मिल गया है।
नेहरू स्टेडियम की अनुमति बनी सबसे बड़ी अड़चन
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने इंदौर में तैयारियां पहले ही शुरू कर दी थीं। राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम को मुख्य स्थल के तौर पर प्रस्तावित किया गया था। लेकिन स्टेडियम की अनुमति को लेकर शुरुआत से ही स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। कांग्रेस की ओर से अनुमति हासिल करने के प्रयास किए जाते रहे, मगर कार्यक्रम की तारीख नजदीक आने के बावजूद अनुमति नहीं मिलने से वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार शुरू हो गया। आखिरकार कार्यक्रम की तारीख ही आगे बढ़ाने का फैसला किया गया।
जीतू पटवारी ने CM को लिखा था पत्र
नेहरू स्टेडियम की अनुमति को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कार्यक्रम के लिए स्थल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। पटवारी ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से भी सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम के लिए जगह उपलब्ध कराने की अपील की थी। इसके बावजूद कार्यक्रम की तारीख बदलने के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस की ओर से अनुमति को लेकर लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद आयोजन अब 19 सितंबर तक टाल दिया गया है।
50 हजार छात्रों को जुटाने का लक्ष्य
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों को जुटाने की तैयारी की जा रही थी।जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस का लक्ष्य कार्यक्रम में करीब 50 हजार छात्रों की मौजूदगी का था। इतनी बड़ी भीड़ के लिए सुरक्षा, पार्किंग, प्रवेश-निकास और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर बड़े स्तर पर इंतजाम की आवश्यकता होगी।कार्यक्रम स्थल को लेकर अनुमति की प्रक्रिया में भीड़ का आकार एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई थी। इंदौर महानगर भाजयुमो अध्यक्ष सौगात मिश्रा ने कांग्रेस पर छात्रों के मुद्दों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया था।भाजपा की ओर से कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद कांग्रेस ने भी छात्रों और युवाओं को कार्यक्रम से जोड़ने की तैयारियां तेज कर दी थीं। मध्य प्रदेश में युवा मतदाताओं की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी को देखते हुए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर युवा वर्ग पर है। ऐसे में राहुल गांधी का छात्रों के बीच प्रस्तावित यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
तारीख बदलने से कांग्रेस को मिली अतिरिक्त तैयारी की मोहलत
12 सितंबर से 19 सितंबर तक कार्यक्रम आगे बढ़ने के बाद कांग्रेस को अब आयोजन की व्यवस्थाओं के लिए करीब एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मिल गया है। पार्टी को नए स्थल का चयन करने के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्रों के आने की स्थिति में सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, मंच, प्रवेश व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजामों को अंतिम रूप देना होगा।अगर रीजनल पार्क के सामने वाले स्थल को अंतिम मंजूरी मिलती है तो कार्यक्रम की पूरी व्यवस्था उसी के अनुरूप तैयार करनी होगी।
अब स्थल की अंतिम घोषणा का इंतजार
फिलहाल कार्यक्रम की नई तारीख 19 सितंबर तय होने की जानकारी सामने आई है, लेकिन आयोजन स्थल को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। कांग्रेस ने नेहरू स्टेडियम के विकल्प के तौर पर दूसरे स्थल पर विचार शुरू कर दिया है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का अंतिम आयोजन स्थल कौन सा होगा और वहां करीब 50 हजार छात्रों की संभावित भीड़ के लिए प्रशासनिक स्तर पर किस तरह की अनुमति और व्यवस्थाएं तय की जाएंगी।
राजनीतिक मायने भी अहम
राहुल गांधी का यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब कांग्रेस और भाजपा दोनों ही मध्य प्रदेश के युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस छात्रों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास कर सकती है, जबकि भाजपा पहले ही इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया दे चुकी है।इसलिए 19 सितंबर को होने वाला कार्यक्रम सिर्फ एक छात्र सम्मेलन नहीं, बल्कि इंदौर में युवा राजनीति की ताकत दिखाने का बड़ा मंच भी बन सकता है।
