Anmol Sandesh News Desk, नैनीताल
नैनीताल के पास ज्योलीकोट क्षेत्र में पीलिया और डायरिया के बढ़ते मामलों ने प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ज्योलीकोट, गांजा, सरियाताल समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों में 100 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है। इलाज के दौरान दो लोगों की मौत के बाद प्रभावित इलाकों में भय का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर मरीजों की जांच कर रही हैं और स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं।
उल्टी-दस्त से शुरू हुई परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक, शुरुआत में लोगों को उल्टी-दस्त, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें हुईं। कई परिवारों ने इसे सामान्य मौसमी बीमारी मानकर स्थानीय स्तर पर इलाज कराया। लेकिन जब मरीजों की संख्या बढ़ने लगी और पीलिया के मामले सामने आए तो स्थिति को गंभीरता से लिया गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कई लोग बीमारी की चपेट में आए। गंभीर मरीजों को नैनीताल और हल्द्वानी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि कुछ मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बरेली और दिल्ली तक ले जाने की जानकारी सामने आई है।
दो मौतों के बाद बढ़ी चिंता
इलाज के दौरान 26 वर्षीय नीमा जोशी और 16 वर्षीय किशोर जीना की मौत की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि एक किशोर ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ा। मौतों की खबर के बाद प्रभावित गांवों में चिंता और बढ़ गई है। हालांकि बीमारी और मौतों के बीच वास्तविक चिकित्सकीय कारणों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
दूषित पानी पर ग्रामीणों का शक
बीमारी फैलने के बाद ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल पेयजल व्यवस्था को लेकर है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि जलापूर्ति से जुड़े किसी स्रोत या टैंक में दूषित पानी पहुंचा हो सकता है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि नैनीताल शहर की सीवर लाइन का गंदा पानी किसी जलस्रोत में पहुंचने के बाद पेयजल आपूर्ति में शामिल हुआ। फिलहाल यह ग्रामीणों की आशंका और आरोप हैं। बीमारी का वास्तविक कारण दूषित पानी है या कोई अन्य संक्रमण, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच और पानी के नमूनों की रिपोर्ट के बाद ही होगी। जिस जलस्रोत में सीवर का पानी मिलने की आशंका जताई गई, उसे वाटर सप्लाई टैंक से अलग किए जाने की जानकारी है।
गांवों में स्वास्थ्य कैंप, घर-घर जांच की मांग
स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर लोगों की जांच कर रही हैं। ग्रामीणों की मांग है कि केवल कैंप तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच की जाए। साथ ही सभी पेयजल स्रोतों, टैंकों और सप्लाई लाइनों से नमूने लेकर तत्काल जांच कराने की मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों में मरीज हैं, उनकी नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि हालत बिगड़ने पर समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके।
बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बंद
बीमारी के संभावित संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने ज्योलीकोट, गांजा और सरियाताल क्षेत्र में 10 स्कूल और 5 आंगनबाड़ी केंद्र एक सप्ताह के लिए बंद करने का फैसला लिया है। बच्चों को संक्रमण के संभावित खतरे से बचाने के लिहाज से इसे एहतियाती कदम माना जा रहा है। अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी के वास्तविक कारण का पता लगाना, सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना और संक्रमण को आगे फैलने से रोकना है। ग्रामीणों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
