Anmol Sandesh News Desk, रायपुर।
छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सल गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा अभियानों के बीच अब सोशल मीडिया पर नक्सल समर्थन से जुड़े कथित वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सामने आए कुछ वीडियो में थुलथुली मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों को कथित तौर पर ‘शहीद’ बताते हुए उनकी प्रशंसा की गई है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और सोशल मीडिया सामग्री की जांच को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि कुछ सोशल मीडिया और यूट्यूब अकाउंट्स से ऐसे वीडियो अपलोड किए गए हैं, जिनमें मुठभेड़ में मारे गए नक्सली नेताओं और कमांडरों को ‘अमर’ बताने की कोशिश की गई। सुरक्षा एजेंसियां इन अकाउंट्स और पोस्ट की निगरानी कर रही हैं तथा संबंधित सामग्री की जांच की जा रही है।
डिप्टी CM अरुण साव के तीखे तेवर
मामले पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कड़ा रुख अपनाते हुए ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज में देश के खिलाफ बोलने वाले लोगों से बचने और उन्हें रोकने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों को सही रास्ते पर लाने की जरूरत है।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी साधा निशाना
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सोशल मीडिया पर नक्सल समर्थन वाले वीडियो को लेकर कहा कि देश में कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं, जिन्हें वे राष्ट्रविरोधी मानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे तत्वों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और लोगों को उनके साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने भी ऐसे समर्थकों के लिए ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का कांग्रेस पर आरोप
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर नक्सलियों को ‘शहीद’ बताने वाले गाने और वीडियो का जिक्र किया। उन्होंने ‘दिमागी नक्सलियों’ के खिलाफ वैचारिक स्तर पर कार्रवाई की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए नक्सलियों का समर्थन करने का आरोप लगाया। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया है और संबंधित वीडियो के पीछे कौन लोग या संगठन हैं, यह अलग जांच का विषय है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल सामग्री किसने तैयार और अपलोड की तथा इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
सोशल मीडिया पर बढ़ी निगरानी
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान के साथ-साथ अब सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि नक्सली विचारधारा के प्रचार और सामान्य राजनीतिक अभिव्यक्ति के बीच कानूनी एवं तथ्यात्मक अंतर को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाए। फिलहाल कथित नक्सल समर्थन वाले वीडियो की जांच और उनसे जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी जारी रहने की बात सामने आई है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
