Anmol Sandesh News Desk | नई दिल्ली/मॉस्को
नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और रूस के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचेंगे। क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 11 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक होगी। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में BRICS नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। पुतिन का यह भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया की नजर भारत-रूस संबंधों, यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर टिकी हुई है। दोनों नेताओं के बीच हाल ही में 31 अगस्त को बिश्केक में SCO Summit के दौरान भी मुलाकात हुई थी।
11 सितंबर की बैठक में क्या होगा?
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक मोदी-पुतिन की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा होगी। रूस ने यह भी संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग और नई परियोजनाओं पर बातचीत आगे बढ़ सकती है। बैठक में रक्षा क्षेत्र भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। रूस की ओर से भारत को Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की पेशकश चर्चा के एजेंडे में शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि विमान की खरीद को लेकर अंतिम निर्णय भारत की ओर से अभी घोषित नहीं हुआ है।
Su-57 पर क्यों टिकी नजर?
Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे स्टील्थ क्षमता और आधुनिक एवियोनिक्स के साथ विकसित किया गया है। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है, इसलिए Su-57 को लेकर संभावित बातचीत को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक चर्चा केवल विमान की खरीद तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि तकनीकी सहयोग और संभावित औद्योगिक साझेदारी जैसे पहलू भी बातचीत का हिस्सा हो सकते हैं।
परमाणु ऊर्जा सहयोग भी एजेंडे में
रूस ने संकेत दिया है कि वह भारत के साथ नई परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों की पुरानी साझेदारी को नया विस्तार मिल सकता है। भारत-रूस सहयोग अब केवल रक्षा और कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष, ऊर्जा, उर्वरक, परिवहन और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन ने अगस्त में हुई मुलाकात के दौरान इन क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी।
यूक्रेन युद्ध पर भी होगी चर्चा
मोदी-पुतिन वार्ता में रूस-यूक्रेन संघर्ष भी अहम मुद्दा बन सकता है। भारत लगातार संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बताता रहा है। क्रेमलिन ने 8 सितंबर को कहा कि रूस यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और भारत की शांति संबंधी कोशिशों का स्वागत करेगा। इसके अलावा पश्चिम एशिया और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहे भू-राजनीतिक प्रभावों पर भी दोनों नेताओं के विचार साझा करने की संभावना है।
डॉलर से दूरी पर रूस का बड़ा बयान
BRICS Summit से पहले रूस ने अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। क्रेमलिन के मुताबिक रूस किसी औपचारिक “डॉलर-विमुखीकरण” (de-dollarisation) अभियान को आगे बढ़ाने का लक्ष्य नहीं रखता। हालांकि मॉस्को अलग-अलग देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं समेत स्वीकार्य भुगतान विकल्पों को बढ़ावा देने के पक्ष में है। भारत और रूस के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। यह व्यवस्था पश्चिमी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय भुगतान की बदलती परिस्थितियों के बीच दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
पुतिन की दिसंबर 2025 के बाद दूसरी भारत यात्रा
पुतिन इससे पहले दिसंबर 2025 में नई दिल्ली आए थे। उस दौरान दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर बैठक हुई थी। अब BRICS Summit के लिए उनका दोबारा भारत आना दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क की निरंतरता को दर्शाता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मोदी और पुतिन की इस साल मुलाकात पहले ही 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में SCO Summit के दौरान हो चुकी है। इसलिए सितंबर की बैठक भारत में पुतिन की यात्रा और दोनों नेताओं की एक और अहम द्विपक्षीय बातचीत होगी।
14 साल बाद फिर भारत में BRICS का बड़ा आयोजन
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS Summit 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। यह आयोजन भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS अब पहले की तुलना में कहीं बड़ा और अधिक विविध समूह बन चुका है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास, तकनीक, ऊर्जा, वैश्विक शासन और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था सख्त
BRICS Summit को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही को देखते हुए कई इलाकों में ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने 11 सितंबर को सरकारी कार्यालयों के लिए अवकाश भी घोषित किया है, ताकि शिखर सम्मेलन के दौरान राजधानी में यातायात और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।
भारत-रूस रिश्तों के लिए क्यों खास है यह मुलाकात?
मोदी-पुतिन बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत एक तरफ रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है, वहीं अमेरिका और यूरोप समेत अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ भी अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। Su-57, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, भुगतान व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और यूक्रेन संघर्ष जैसे मुद्दों पर होने वाली बातचीत यह संकेत दे सकती है कि आने वाले समय में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
