Anmol Sandesh News Desk, भोपाल।
CM Mohan Yadav Police Advice: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सोशल मीडिया की लोकप्रियता के बजाय जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की नसीहत दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिसकर्मियों के लिए रील बनाने से ज्यादा जरूरी रियल प्रॉब्लम यानी आम जनता की वास्तविक समस्याओं को सुलझाना होना चाहिए। पुलिस की पहचान सोशल मीडिया पर वायरल होने से नहीं, बल्कि उसके काम, व्यवहार और जनता के बीच बने विश्वास से होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों से अपील की कि वे ऐसे अधिकारी बनें, जिनका सम्मान समाज के सभी वर्गों में समान रूप से हो। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, गरीबों और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उनकी मदद करें। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों के लिए देवदूत की भूमिका निभानी चाहिए।
‘सोशल मीडिया से ज्यादा महत्वपूर्ण सोशल इश्यूज’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के भौंरी स्थित केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में आयोजित 44वें और 45वें उप पुलिस अधीक्षक (DSP) बैच के दीक्षांत परेड समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवा अधिकारियों को बधाई दी।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर सोशल मीडिया का है और पुलिस अधिकारी भी इससे जुड़े रहें, इसमें कोई परेशानी नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के साथ-साथ समाज की वास्तविक समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “हमारे लिए सोशल मीडिया से ज्यादा सोशल इश्यू अहम हैं। आप सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें, लेकिन समस्याओं को दिखाने के बजाय उनके समाधान पर ध्यान दें। रील बनाने से ज्यादा रियल प्रॉब्लम सुलझाने में आपके हर क्षण की कीमत होनी चाहिए।”
सीएम ने पुलिस अधिकारियों को संदेश दिया कि उनकी प्राथमिकता जनता की शिकायतों का निराकरण, पीड़ितों को न्याय दिलाना और समाज में सुरक्षा का वातावरण बनाए रखना होनी चाहिए।
महिलाओं, बच्चों और गरीबों की मदद को बताया प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने पुलिस की जिम्मेदारी को केवल अपराधियों की गिरफ्तारी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं बताया, बल्कि आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों से समाज के हर वर्ग को समान सम्मान और सुरक्षा मिलने की अपेक्षा है। खासकर माता-बहनों, बच्चों, गरीबों और कमजोर वर्गों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। पुलिस का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि जरूरतमंद व्यक्ति बिना किसी डर के अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंच सके।
सीएम ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे अपने कार्यों से जनता का भरोसा जीतें और सेवा भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
‘पासिंग आउट परेड समापन नहीं, पब्लिक सर्विस की शुरुआत’
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण पूरा कर पुलिस सेवा में प्रवेश करने जा रहे युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पासिंग आउट परेड उनके लिए किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा की एक नई शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के 8.5 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा का दायित्व अब इन युवा अधिकारियों के कंधों पर आने वाला है। यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ निभाना होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज और प्रदेश की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है।
मध्य प्रदेश पुलिस के गौरवशाली इतिहास का किया जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश पुलिस का अतीत गौरवशाली रहा है। यहां के पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग दौर में सामने आई चुनौतियों का तत्परता, दक्षता और कर्तव्यपरायणता के साथ सामना किया है।
सीएम ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक मध्य प्रदेश के कई इलाके डाकुओं की समस्या से प्रभावित रहे। चंबल और रीवा अंचल में डाकुओं की चुनौती पुलिस के सामने बड़ी समस्या थी। लेकिन पुलिस बल ने लगातार प्रयास और कार्रवाई के माध्यम से इस चुनौती का सामना किया और डाकुओं की समस्या के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने नई पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों से इसी परंपरा को आगे बढ़ाने और आधुनिक समय की नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार रखने का आह्वान किया।
नई पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों से बड़ी अपेक्षाएं
मुख्यमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि पुलिस की सफलता केवल अपराध नियंत्रण के आंकड़ों से नहीं, बल्कि जनता को मिलने वाली राहत और सुरक्षा से भी तय होती है। सोशल मीडिया के दौर में पुलिस अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों और प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री की इस नसीहत को पुलिस विभाग के अधिकारी अपने कामकाज में किस तरह उतारते हैं और आम जनता की समस्याओं के समाधान को कितनी प्राथमिकता देते हैं।
