Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के लिए जगह और बुकिंग की व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जंतर-मंतर को सार्वजनिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन के वैकल्पिक स्थलों के रूप में निर्धारित किया गया है। इस बदलाव के बीच रामलीला मैदान में जगह पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है, जबकि यहां प्रदर्शन आयोजित करने का खर्च भी आयोजकों के बजट पर भारी पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि रामलीला मैदान में अगले करीब ढाई महीने तक बुकिंग की तारीखें उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, एक दिन के आयोजन का शुरुआती खर्च टैक्स सहित लगभग 1.21 लाख रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में बड़े प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों के सामने जगह, तारीख और खर्च की चुनौती खड़ी हो सकती है।
रामलीला मैदान में बुकिंग फुल, तारीख के लिए करना होगा इंतजार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामलीला मैदान में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए सीमित तारीखें उपलब्ध हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 29, 30 और 31 दिसंबर की तारीखें बुकिंग के लिए खाली बताई गई हैं। इससे पहले की तारीखों के लिए आयोजकों को उपलब्धता की पुष्टि करनी होगी।
दिल्ली में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और अन्य समूहों की ओर से समय-समय पर बड़े प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में किसी मैदान की उपलब्धता और उसकी बुकिंग प्रक्रिया प्रदर्शन की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाती है।
हालांकि, बुकिंग की उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है। इसलिए आयोजन की तारीख तय करने से पहले संबंधित विभाग से इसकी पुष्टि करना जरूरी है।
एक दिन की बुकिंग का खर्च ₹1.21 लाख तक
रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए आयोजकों को निर्धारित शुल्क और सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होता है। रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि मैदान की बुकिंग दर 50,000 रुपये प्रतिदिन है। इसके अलावा 55,000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी होती है।
टैक्स को जोड़ने के बाद एक दिन की बुकिंग का शुरुआती खर्च लगभग 1.21 लाख रुपये बताया गया है। सिक्योरिटी डिपॉजिट वापसी योग्य होने के कारण इसे अंतिम खर्च से अलग समझना जरूरी है। इसके अलावा आयोजन के अन्य खर्च, जैसे मंच, ध्वनि व्यवस्था और दूसरी सुविधाओं का खर्च अलग हो सकता है।
इस शुल्क व्यवस्था के चलते बड़े संगठनों के लिए भी प्रदर्शन का बजट तैयार करते समय अतिरिक्त योजना बनाना जरूरी हो सकता है।
जंतर-मंतर पर क्या थी व्यवस्था?
जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के प्रमुख स्थलों में शामिल रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वहां प्रदर्शन के लिए मैदान की इस तरह की बुकिंग फीस नहीं देनी पड़ती थी। अब जंतर-मंतर को सार्वजनिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की खबर के बाद वैकल्पिक स्थानों की उपलब्धता और शुल्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, प्रतिबंधों और मौजूदा नियमों की सटीक स्थिति की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेशों से की जानी चाहिए। किसी स्थल को सूची से हटाने और वहां हर परिस्थिति में प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बीच कानूनी अंतर हो सकता है।
बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड भी विकल्प
रिपोर्ट्स के अनुसार, रामलीला मैदान के अलावा बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड भी प्रदर्शन आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थल हैं। इन स्थानों पर आयोजन के लिए संबंधित अधिकारियों की अनुमति और लागू शर्तों का पालन करना होगा।
रामलीला मैदान की बुकिंग दिल्ली नगर निगम के हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा देखे जाने की जानकारी दी गई है। इसके लिए दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी NOC लेना भी जरूरी बताया गया है।
इस प्रक्रिया में आयोजकों को मैदान की उपलब्धता, अनुमति और शुल्क संबंधी औपचारिकताओं को समय रहते पूरा करना होगा।
छोटे आयोजनों के लिए मुफ्त जगह का प्रावधान
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रामलीला मैदान में 150 लोगों तक की सभाओं के लिए एक छोटा हिस्सा मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। यह व्यवस्था छोटे समूहों के लिए उपयोगी हो सकती है, हालांकि इसकी पात्रता, उपलब्धता और अन्य शर्तों की पुष्टि संबंधित विभाग से करना जरूरी है।
बड़े आयोजनों के लिए शुल्क, सुरक्षा जमा और पुलिस की अनुमति जैसी शर्तें लागू हो सकती हैं। इस वजह से छोटे और बड़े प्रदर्शनों की व्यवस्थाओं में अंतर दिखाई देता है।
प्रदर्शन की जगह और खर्च पर उठ रहे सवाल
जंतर-मंतर के विकल्पों के रूप में अन्य मैदानों का इस्तेमाल किए जाने की खबर के बीच मुख्य सवाल यह है कि प्रदर्शन आयोजित करने के लिए पर्याप्त जगह और उचित तारीखें कितनी आसानी से मिल पाएंगी। रामलीला मैदान में लंबी वेटिंग और एक दिन के आयोजन के लिए बताए गए खर्च से आयोजकों की योजना प्रभावित हो सकती है।
