Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
MP Weather Today: मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई के दौर में पहुंच चुका है। प्रदेश में अब तक औसतन 33.2 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य मानसूनी कोटे का करीब 89.3 प्रतिशत है। मानसून सीजन समाप्त होने में करीब 11 दिन बाकी हैं और अब मौसम का आखिरी दौर प्रदेश के बारिश के आंकड़े के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा करीब 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटा पूरा करने के लिए अभी लगभग 4.1 इंच बारिश की जरूरत है। अगर सितंबर के अंतिम दिनों में कोई मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय होती है और अच्छी बारिश होती है, तो बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि सभी जिलों में सामान्य आंकड़ा पूरा होना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
22 सितंबर तक बारिश और गरज-चमक का दौर
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। IMD के 18 सितंबर के बुलेटिन में पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए 19 से 22 सितंबर तक गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना दर्ज की गई है। वहीं, मौसम में एक और बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। IMD के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार 19 सितंबर के आसपास अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे आगे मौसम की गतिविधियों में बदलाव हो सकता है।
कई जिलों में बारिश अब भी सामान्य से कम
प्रदेश के कई जिलों में मानसून की बारिश अभी सामान्य आंकड़े से पीछे है। खासतौर पर इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर जैसे जिलों में सामान्य बारिश के मुकाबले कमी बनी हुई है। ऐसे जिलों के लिए मानसून के बचे हुए दिन महत्वपूर्ण हैं। अंतिम दौर में यदि अच्छी बारिश होती है तो आंकड़ों में सुधार हो सकता है।
मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से ज्यादा पानी
दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश सामान्य से काफी ज्यादा हुई है। मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे के मुकाबले दोगुने से अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, शहडोल और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है।
जून की कम बारिश बनी बड़ी वजह
इस मानसून सीजन में शुरुआती कमी अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। जून में प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में बारिश की गतिविधियां बढ़ीं, लेकिन शुरुआती कमी के कारण पूरे सीजन का आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। मौसम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार मानसून के दौरान दो बार बारिश की गतिविधियों में ब्रेक आने से भी कुल बारिश प्रभावित हुई। अब सितंबर का अंतिम दौर इस कमी को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
मानसून की विदाई से पहले आखिरी उम्मीद
मध्य प्रदेश में अब मानसून के कुछ ही दिन बाकी हैं। प्रदेश को सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी करीब 4 इंच से ज्यादा पानी की जरूरत है। आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और सक्रिय मौसम प्रणालियां तय करेंगी कि प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े के कितने करीब पहुंचता है।
