Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची तीन दिवसीय भारत दौरे पर रवाना हो गई हैं और आज उनके नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है। इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी।

भारत-जापान व्यापार में बड़ा बदलाव संभव
दोनों देश एक नई वित्तीय व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत आपसी व्यापार में अब अमेरिकी डॉलर की बजाय सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन में भुगतान किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद व्यापारियों को डॉलर रूपांतरण की प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा, जिससे लेनदेन अधिक सस्ता, तेज और सरल हो जाएगा।
मौजूदा सिस्टम में क्या समस्या है?
फिलहाल भारत और जापान के बीच व्यापार के दौरान भुगतान पहले रुपये और येन से डॉलर में बदला जाता है, फिर अंतिम लेनदेन होता है। इस प्रक्रिया में—
- दो बार मुद्रा बदलने का अतिरिक्त खर्च आता है
- डॉलर की दरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है
- लेनदेन प्रक्रिया धीमी और जटिल हो जाती है
नई व्यवस्था इन सभी समस्याओं को खत्म करने में मदद करेगी।
नई व्यवस्था कैसे काम करेगी?
प्रस्तावित प्रणाली के तहत—
- जापानी कंपनियां भारत में विशेष बैंक खाते खोल सकेंगी
- भारतीय कंपनियां सीधे रुपये में भुगतान कर सकेंगी
- जापानी कंपनियां सीधे येन् में भुगतान करेंगी
- विदेशी मुद्रा (डॉलर) पर निर्भरता कम होगी
इस पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की बैठक के बाद लिया जा सकता है।
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम केवल मुद्रा निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी और निवेश संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच लगभग 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। यदि रुपये-येन में सीधे लेनदेन की व्यवस्था लागू होती है, तो यह व्यापार और भी तेजी से बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था—
- लेनदेन लागत कम करेगी
- व्यापार को आसान बनाएगी
- मुद्रा जोखिम घटाएगी
- और भविष्य में द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देगी
जापान की प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत-जापान संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यदि रुपये-येन में सीधा व्यापार लागू होता है, तो यह दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नए स्तर पर ले जाने वाला ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।


