Anmol Sandesh News Desk, उज्जैन
बाबा महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब प्रसाद का स्वाद और भी खास होने जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने अन्नक्षेत्र में एक नई पहल शुरू करते हुए दक्षिण भारतीय प्रसाद परोसने की व्यवस्था लागू कर दी है। मंगलवार से शुरू हुई इस पहल के तहत अब हर मंगलवार और शुक्रवार श्रद्धालुओं को पारंपरिक भोजन के साथ विशेष दक्षिण भारतीय व्यंजन भी प्रसाद के रूप में परोसे जाएंगे।सावन के पावन महीने को देखते हुए अन्नक्षेत्र में फलाहारी प्रसाद की भी विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि व्रत रखने वाले श्रद्धालु भी प्रसाद ग्रहण कर सकें।

‘विविधता में एकता‘ का अनोखा संदेश
मंदिर प्रशासन के अनुसार, मध्य प्रदेश में पहली बार किसी मंदिर के अन्नक्षेत्र में इस तरह की पहल की गई है। इसका उद्देश्य देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को भारत के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों से जोड़ना और “विविधता में एकता” की भावना को मजबूत करना है।
हर मंगलवार और शुक्रवार रहेगा स्पेशल मेन्यू
मंगलवार का प्रसाद
- इडली
- सांभर
- स्टीम राइस
- पोंगल
- मौसमी सब्जी
शुक्रवार का प्रसाद
- पुलिहरा (इमली राइस)
- रसम
- पायसम
- स्टीम राइस
- मौसमी सब्जी
इससे पहले अन्नक्षेत्र में नियमित रूप से दाल, रोटी, चावल, सब्जी और मिठाई का प्रसाद परोसा जाता था।
स्वाद और गुणवत्ता का रहेगा विशेष ध्यान
दक्षिण भारतीय व्यंजनों का असली स्वाद बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष शेफ की नियुक्ति की है। यह शेफ कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगा, जबकि दो कर्मचारियों को केवल दक्षिण भारतीय प्रसाद तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रोजाना हजारों श्रद्धालु करते हैं प्रसाद ग्रहण
स्मार्ट पार्किंग परिसर में स्थित दो मंजिला अन्नक्षेत्र का संचालन मंदिर प्रबंध समिति करती है।
मुख्य आंकड़े
- वर्ष 2023 में हुआ अन्नक्षेत्र का शुभारंभ
- एक समय में 370 श्रद्धालु बैठकर कर सकते हैं भोजन
- सामान्य दिनों में करीब 9 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं
- बड़े पर्वों पर यह संख्या 12 हजार तक पहुंच जाती है
- भोजन बनाने के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाता है
सावन में मिलेगी फलाहारी थाली
सावन माह के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रशासन ने फलाहारी प्रसाद की भी अलग व्यवस्था की है, जिससे सभी भक्त अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार प्रसाद ग्रहण कर सकें।
क्यों है यह पहल खास?
महाकाल मंदिर की यह नई व्यवस्था केवल भोजन में बदलाव नहीं, बल्कि देशभर की सांस्कृतिक विविधता को एक थाली में परोसने का प्रयास है। इससे उत्तर से दक्षिण तक आने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के स्वाद का भी अनुभव मिलेगा।
