Anmol Sandesh News Desk, न्यूयॉर्क
Mohan Bhagwat in New York: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत की विविधता, धार्मिक सौहार्द और मानवता को लेकर बड़ा संदेश दिया। अपने करीब 42 मिनट के संबोधन में भागवत ने कहा कि भारत की पहचान अलग-अलग धर्मों, परंपराओं और मान्यताओं को साथ लेकर चलने की रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए, तो ऐसी सोच हिंदू विचार के अनुरूप नहीं है।
‘भारत की मूल चेतना किसी को बाहर करने की नहीं’
मोहन भागवत ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश की मूल भावना किसी समुदाय को बाहर करने की नहीं रही है। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं और जीवनशैलियां लंबे समय से साथ-साथ मौजूद रही हैं। उनके मुताबिक, विविधता भारत की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी खूबसूरती और ताकत है। भागवत ने अलग-अलग पहचान रखने वाले लोगों के बीच सम्मान और स्वीकार्यता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल विविधता को स्वीकार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अलग-अलग परंपराओं और पहचानों की रक्षा भी जरूरी है।
‘एकता और विविधता भारत के DNA में’
अपने संबोधन में भागवत ने भारत की एकता को उसकी विविधता से जोड़ते हुए कहा कि लोगों की भाषा, पहनावा, रहन-सहन और धार्मिक परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके बीच एक गहरा जुड़ाव मौजूद है। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA का हिस्सा है। अलग-अलग पहचान के बावजूद समाज को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
‘एक दुनिया, एक मानवता’ पर जोर
न्यूयॉर्क में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने मानवता को संकीर्ण पहचान से ऊपर रखने की बात कही। उन्होंने RSS के व्यापक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया को एक परिवार और मानवता को एक इकाई के रूप में देखने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, समाज को बांटने वाली सोच के बजाय लोगों को जोड़ने वाली विचारधारा पर ध्यान देना चाहिए। भागवत ने यह भी कहा कि केवल राजनीतिक शक्ति के जरिए समाज में स्थायी परिवर्तन नहीं लाया जा सकता। सामाजिक बदलाव के लिए लोगों के बीच व्यापक सहमति और जनमत का निर्माण जरूरी है।
‘सिर्फ राजनीति से नहीं बदलता समाज’
भागवत ने राजनीति में बढ़ते व्यक्तिगत स्वार्थ की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि केवल ‘मैं’ और व्यक्तिगत हित को केंद्र में रखकर किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। उनके अनुसार, जब समाज किसी विषय पर व्यापक रूप से एकमत होता है और जनमत तैयार होता है, तब राजनीतिक व्यवस्था पर भी उसी दिशा में काम करने का दबाव बनता है।
भारतीय मूल के लोगों को ‘कर्मभूमि’ का संदेश
अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का अर्थ यह नहीं है कि जिस देश में व्यक्ति रह रहा है, उसके समाज और व्यवस्था से दूरी बनाई जाए। उनका संदेश था कि जहां व्यक्ति रहता और काम करता है, वहां के समाज के प्रति भी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ योगदान देना चाहिए।
‘व्यक्ति, समाज और पर्यावरण—तीनों का संतुलन जरूरी’
भागवत ने विकास और प्रगति की अवधारणा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति ऐसी होनी चाहिए जिसमें व्यक्ति, समाज और पर्यावरण—तीनों के हितों का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर न व्यक्ति को दबाया जाना चाहिए और न ही समाज अथवा प्रकृति को नुकसान पहुंचाया जाना चाहिए।
न्यूयॉर्क से मोहन भागवत का संदेश
मोहन भागवत के संबोधन में धार्मिक सौहार्द, सामाजिक एकता, विविधता के सम्मान, मानवता और जिम्मेदार नागरिकता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। खास तौर पर मुसलमानों को भारत से बाहर करने की सोच को हिंदू विचार के अनुरूप न बताने वाला उनका बयान चर्चा का केंद्र बन गया है।
