Anmol Sandesh News Desk, भोपाल/उज्जैन।
मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस यात्रा पर तंज कसते हुए कहा कि “भगवान के नाम पर यात्रा करते हैं तो भाव भी जरूरी है।” मुख्यमंत्री के इस बयान को यात्रा के धार्मिक संदेश और उसके पीछे की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
दिग्विजय सिंह की यह यात्रा उज्जैन से शुरू हुई, जहां महाकाल के जयकारों और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के बीच श्रद्धालुओं और साधु-संतों की मौजूदगी देखने को मिली। यात्रा में सनातन धर्म के ध्वज के साथ एक विशेष रथ भी शामिल है, जिस पर भगवान शिव और माता पार्वती की भव्य झांकी सजाई गई है।
क्या बोले मुख्यमंत्री मोहन यादव?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सत्य की असत्य पर विजय का यह पर्व सरकार और समाज मिलकर मना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लगातार तीसरे वर्ष सरकार और समाज मिलकर दशहरा उत्सव मना रहे हैं।
इसी दौरान दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “भगवान के नाम पर यात्रा करते हैं तो भाव भी जरूरी है।”
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिग्विजय सिंह की यात्रा धार्मिक आस्था, सनातन परंपराओं और धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर निकाली जा रही है।
उज्जैन से शुरू हुई ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की इस यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म के मूल आदर्शों—सत्य, न्याय, सदाचार, करुणा और स्वाभिमान—के प्रति जनजागरण करना बताया गया है।
यात्रा में साधु-संतों और सनातन धर्म के ध्वज के साथ धार्मिक प्रतीकों को भी प्रमुखता दी गई है। भगवान शिव और माता पार्वती की झांकी से सजे विशेष रथ को भी यात्रा का हिस्सा बनाया गया है।
यात्रा के दौरान विभिन्न नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों, धर्मावलंबियों और सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद करने की योजना है। इसके माध्यम से धार्मिक आस्था के सम्मान और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने की बात कही गई है।
आखिर क्यों निकाली जा रही है यह यात्रा?
‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का एक प्रमुख उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं से मिलने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को जन-जन तक पहुंचाना है।
यात्रा के आयोजकों के मुताबिक, धार्मिक संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता, सनातन धर्म के मूल आदर्शों के प्रति जागरूकता और सत्य एवं न्याय के प्रति प्रतिबद्धता इस पहल के महत्वपूर्ण विषय हैं।
इसके अलावा, यात्रा के माध्यम से धार्मिक आस्था का सम्मान बनाए रखने और समाज में सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश देने की बात भी कही गई है।
धार्मिक मुद्दों पर सियासी बहस तेज
मध्य प्रदेश में धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं। दिग्विजय सिंह की इस यात्रा और मुख्यमंत्री मोहन यादव की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।
एक ओर यात्रा के माध्यम से धार्मिक स्थलों पर दान और चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता की मांग उठाई जा रही है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने भगवान के नाम पर यात्रा करने के साथ भावना के महत्व पर जोर दिया है।
