Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने का मामला अब सरकार के स्तर तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लेने की बात कही है। वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए राज्य के संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
इस घटना के बाद आदिवासी परिवारों के आवास, वन भूमि पर कब्जे और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घरों को हटाने की कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं।
CM मोहन यादव बोले—जांच कराने में कोई बुराई नहीं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सीहोर की घटना उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है और अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उन्होंने मुख्य सचिव को भी इस संबंध में जानकारी दे दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी वरिष्ठ नेता ने इस मामले को उठाया है, तो इसकी जांच कराने में कोई बुराई नहीं है। जांच से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। उन्होंने सरकार को संवेदनशील बताते हुए कहा कि मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने जारी किया नोटिस
सीहोर की घटना का संज्ञान राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
जिन अधिकारियों से जवाब तलब किए जाने की जानकारी दी गई है, उनमें मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं। आयोग ने तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।
आयोग की इस कार्रवाई के बाद मामले में प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और जांच रिपोर्ट से कार्रवाई की परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।
शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों से की थी मुलाकात
कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर गिराए जाने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद उन्होंने घरों को तोड़े जाने और कुएं को मिट्टी से पाटे जाने पर नाराजगी जताई थी।
शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई को गंभीर मामला बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की बात कही थी। उन्होंने इस विषय को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के संज्ञान में लाने की भी जानकारी दी थी।
उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में आ गया। अब मुख्यमंत्री की ओर से जांच की बात कहे जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, सीहोर जिले के कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को राज्य वन विकास निगम की ओर से 12 आदिवासी परिवारों के घर हटाए गए थे। संबंधित जमीन राज्य वन विकास निगम को आवंटित की गई थी और वहां पौधरोपण किया गया था।
बताया गया है कि वर्ष 2022 में कुछ आदिवासी परिवारों ने इस क्षेत्र में पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर खेती शुरू कर दी थी। इसके बाद उन्हें नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। आगे चलकर वन विकास निगम की ओर से घरों को हटाने की कार्रवाई की गई।
हालांकि, कार्रवाई की परिस्थितियों, प्रभावित परिवारों की स्थिति और संबंधित नियमों के पालन को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
इस मामले में अब तीन स्तरों पर कार्रवाई और जवाबदेही अहम है—राज्य सरकार की जांच, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से मांगा गया जवाब और संबंधित विभागों का पक्ष। जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं और प्रभावित परिवारों के दावों में क्या तथ्य सामने आते हैं।
