Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
NEET पेपर लीक मामले और उससे जुड़े छात्र प्रदर्शन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों और पेपर लीक में शामिल आरोपियों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर जोर दिया।

छात्र और आरोपी अलग-अलग हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जिन छात्रों का पेपर लीक या किसी गैरकानूनी गतिविधि से कोई संबंध साबित नहीं होता, उन्हें केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।वहीं, पेपर लीक की साजिश रचने, उसमें शामिल होने या सहयोग करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है, तो उसे बेवजह संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में किसी अपराधी को बचाने की भी अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
हमला किसने किया? जांच जारी
सुनवाई के दौरान यह भी चर्चा हुई कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला वास्तव में किसने किया। अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठा कि क्या हमला छात्रों ने किया था या भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों ने।फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है। अदालत ने अभी तक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश नहीं दिया है, हालांकि जांच की दिशा पर आगे विचार किया जा सकता है।
लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी है। इसलिए किसी भी निर्णय का असर उन छात्रों पर नहीं पड़ना चाहिए जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी है।अदालत ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि एक ओर निर्दोष छात्रों के अधिकार सुरक्षित रहें और दूसरी ओर दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिल सके।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश
- छात्रों और आरोपियों के मामलों को अलग-अलग देखा जाए।
- पेपर लीक में शामिल लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- पुलिस द्वारा बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
- निर्दोष छात्रों के हितों की हर हाल में रक्षा की जाए।
- कानून के दायरे में रहकर पूरे मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए।
