Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
PM Modi Ladakh Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख के विकास को केंद्र सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकार का विशेष ध्यान यहां की नई पीढ़ी पर है। युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को लद्दाख में लगभग 3,350 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं में लेह एयरपोर्ट का नया यात्री टर्मिनल, निम्मू-पदुम-दारचा सड़क, हानू की जलविद्युत परियोजना, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, जल संरक्षण के लिए जलाशय और प्राचीन शैलकला के संरक्षण से जुड़ी पहल शामिल हैं। इनका उद्देश्य लद्दाख की कनेक्टिविटी मजबूत करना, बिजली और पानी की उपलब्धता बढ़ाना, पर्यटन को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन यहां के लोगों की प्रतिभा और क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
युवाओं पर मोदी सरकार का फोकस, लद्दाख में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लद्दाख के युवाओं को अच्छी शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने और स्थानीय उद्यमियों को देश-दुनिया के बाजारों से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे लद्दाख के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और स्थानीय स्तर पर नए अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है। प्रधानमंत्री ने खेलों में लद्दाख की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहां के युवाओं ने आइस हॉकी और पर्वतारोहण जैसे क्षेत्रों में पहचान बनाई है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलें, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर सकें।
पहले की सरकारों पर निशाना, बोले- अब विकास को मिल रही प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण लद्दाख में जीवन और विकास कार्यों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक, पहले की सरकारों ने इस क्षेत्र के विकास को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी, जबकि केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद यहां विकास कार्यों पर अधिक ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सड़क नेटवर्क, पुलों, हेलीपैड, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, लद्दाख में सड़क संपर्क का विस्तार हुआ है, बड़े पुलों की संख्या बढ़ी है और हेलीपैड की उपलब्धता में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने घरों तक नल से जल पहुंचाने और अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि इन सुविधाओं से आम लोगों को लाभ मिल रहा है।
निम्मू-पदुम-दारचा सड़क से सफर होगा आसान, सेना को भी मिलेगी मदद
लद्दाख के लिए सबसे अहम परियोजनाओं में 298 किलोमीटर लंबी निम्मू-पदुम-दारचा सड़क शामिल है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा निर्मित यह मार्ग लेह के निम्मू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ेगा और जांस्कर घाटी से होकर गुजरेगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस सड़क से यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है। उन्होंने बताया कि जिस सफर में पहले लगभग 12 घंटे लगते थे, वह अब करीब तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय सड़क की स्थिति, मौसम और यात्रा के शुरुआती तथा अंतिम बिंदुओं पर निर्भर करेगा। इस सड़क का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। इससे लद्दाख तक पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध होगा। क्षेत्र में रणनीतिक आवाजाही, सेना के जवानों और जरूरी सामान की ढुलाई को भी सुविधा मिल सकती है। जांस्कर घाटी के स्थानीय लोगों को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से अस्पतालों, स्कूलों, बाजारों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। शिंकुन ला दर्रे से जुड़ा यह मार्ग रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
लेह एयरपोर्ट का नया टर्मिनल, यात्री क्षमता 35 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य
लेह के कुशोक बकुला रिनपोछे एयरपोर्ट पर नया यात्री टर्मिनल विकसित किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस परियोजना पर लगभग 640 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। टर्मिनल का क्षेत्रफल करीब 23,800 वर्ग मीटर बताया गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, नए टर्मिनल से एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता 10 लाख से बढ़कर लगभग 35 लाख हो सकेगी। उड़ानों की संख्या भी तीन गुना तक बढ़ने की संभावना जताई गई है। नए टर्मिनल में यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत को भी डिजाइन में शामिल किया गया है। ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से जियोथर्मल ऊर्जा के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है। क्षमता में यह विस्तार पर्यटन, स्थानीय कारोबार और क्षेत्रीय संपर्क के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लद्दाख आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी बन सकते हैं।
40 गांवों में बने जलाशय, किसानों को सिंचाई में मिलेगी मदद
लद्दाख जैसे ठंडे और शुष्क क्षेत्र में पानी का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट अमृत हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में 40 जलाशय बनाए गए हैं। इन जलाशयों का उद्देश्य पानी को जमा करके जरूरत के समय इस्तेमाल करना है। लद्दाख में बर्फ पिघलने के दौरान कुछ समय के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होता है, लेकिन खेती के महत्वपूर्ण चरणों में पानी की कमी हो सकती है। जलाशयों में पानी संग्रहित होने से किसानों को सिंचाई के लिए मदद मिल सकती है। इससे खेती को सहारा देने, स्थानीय आजीविका मजबूत करने और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने इन जलाशयों को क्षेत्र के लोगों को समर्पित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों को पूरा करने और जीवन स्तर बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सिंधु घाट पर बनेगा देश का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क
लद्दाख की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए लेह के सिंधु घाट पर देश का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क बनाने की पहल की गई है। पेट्रोग्लिफ ऐसी प्राचीन आकृतियां और चित्र होते हैं, जिन्हें चट्टानों या पत्थरों की सतह पर उकेरा गया होता है। इनमें मानव जीवन, वन्यजीवों और विभिन्न प्रतीकों से संबंधित चित्र मिलते हैं। ये शैलकलाएं प्राचीन समाज, उसकी जीवनशैली और ऐतिहासिक विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। संरक्षण पार्क का उद्देश्य इन धरोहरों को नुकसान से बचाना, इनके महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है। इससे लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
हानू जलविद्युत परियोजना से बिजली व्यवस्था होगी मजबूत
लद्दाख में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 9 मेगावाट की हानू स्मॉल हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना को भी विकास योजनाओं में शामिल किया गया है। इसके साथ 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी ट्रांसमिशन लाइन का भी उल्लेख किया गया है। जलविद्युत परियोजना स्थानीय जल संसाधनों के जरिए बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है। वहीं, ट्रांसमिशन लाइन से बिजली आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने और दूरस्थ इलाकों तक बिजली पहुंचाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियों में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति घरों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, स्थानीय कारोबार और पर्यटन गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है।
विदेशी मेहमानों को लद्दाख की बनी चीजें देते हैं प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्यमियों को देश और दुनिया से जोड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने लद्दाख की खेल प्रतिभाओं का जिक्र करते हुए युवाओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलने से क्षेत्र की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और दूसरे व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
विकास, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिल सकती है नई गति
लद्दाख में शुरू की गई इन परियोजनाओं का असर सड़क और हवाई संपर्क से लेकर बिजली, पानी, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण तक कई क्षेत्रों में पड़ सकता है। बेहतर सड़कें सेना और आम नागरिकों की आवाजाही को सुविधाजनक बना सकती हैं। एयरपोर्ट की बढ़ी क्षमता पर्यटन को प्रोत्साहित कर सकती है। जलाशय किसानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जबकि बिजली परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे सकती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और क्षेत्र की नई पीढ़ी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम जारी रहेगा।
