Anmol Sandesh News Desk, जबलपुर
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़े मामले में जबलपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दायर परिवाद को खारिज कर दिया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा पर्याप्त प्रथमदृष्टया साक्ष्य नहीं है, जिससे मंत्री के खिलाफ इस मामले में आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा/गोटेगांव क्षेत्र में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। परिवादी कौशल सिलावट ने आरोप लगाया था कि यात्रा के दौरान राष्ट्रीय ध्वज को एक वाहन के बोनट पर इस तरह लगाया गया था कि वह मंत्री के पैरों को छू रहा था। इसी को राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला बताते हुए पुलिस में शिकायत की गई थी। पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए परिवादी ने जबलपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट का रुख किया था। मामले में अदालत ने मार्च 2026 में मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था।
कोर्ट में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से घटना से संबंधित तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। दूसरी ओर, अदालत के समक्ष यह पर्याप्त रूप से साबित नहीं हो सका कि संबंधित तिरंगा मंत्री के निर्देश पर लगाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, पेश की गई तस्वीरों में वाहन का नंबर भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था। इन्हीं परिस्थितियों में अदालत ने प्रथमदृष्टया अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और परिवाद खारिज कर दिया।
पहले कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
इस मामले में मार्च 2026 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया था। उस समय परिवादी ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी। परिवादी पक्ष ने आरोप लगाया था कि 2024 की तिरंगा यात्रा के दौरान राष्ट्रीय ध्वज को वाहन के बोनट पर अनुचित तरीके से रखा गया था।
तस्वीरों और सबूतों पर रहा फोकस
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि उपलब्ध तस्वीरों और अन्य सामग्री से क्या यह स्थापित होता है कि राष्ट्रीय ध्वज को जिस वाहन पर लगाया गया था, वह मंत्री से संबंधित था और उसे उनके निर्देश पर लगाया गया था। अदालत के सामने प्रस्तुत सामग्री से यह बात प्रथमदृष्टया पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुई। इसी आधार पर अदालत ने परिवाद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
मंत्री को मिली कानूनी राहत
अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने के बाद इस मामले में राव उदय प्रताप सिंह को फिलहाल कानूनी राहत मिली है। हालांकि, खबर को “तिरंगे के अपमान से क्लीन चिट” जैसे शब्दों में पेश करने के बजाय यह कहना अधिक सटीक है कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परिवाद खारिज किया और प्रथमदृष्टया अपराध स्थापित नहीं माना।
एक नजर में पूरा मामला
- मामला: राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान का आरोप
- घटना: 11 अगस्त 2024 की तिरंगा यात्रा
- स्थान: नरसिंहपुर क्षेत्र
- आरोप: वाहन के बोनट पर तिरंगा लगाए जाने को लेकर आपत्ति
- परिवादी: कौशल सिलावट
- अदालत: विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट, जबलपुर
- मार्च 2026: मंत्री को अदालत से नोटिस जारी हुआ था
- 17 सितंबर 2026: परिवाद खारिज
- अदालत का आधार: उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथमदृष्टया अपराध स्थापित नहीं हुआ; वाहन/मंत्री के निर्देश से संबंधित पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला।
