Anmol Sandesh News Desk, रीवा
मध्य प्रदेश के रीवा से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील के बसही गांव की महज चार माह की बच्ची के गले में पायल का एक टुकड़ा फंस गया था। बच्ची को करीब तीन दिनों से खाने-पीने में परेशानी के साथ लगातार दर्द हो रहा था, लेकिन परिवार इलाज के बजाय झाड़-फूंक में उलझा रहा। हालत बिगड़ने पर जब बच्ची को अस्पताल ले जाया गया तो जांच के दौरान उसके गले में फंसी वस्तु का पता चला। इसके बाद मासूम को गंभीर हालत में रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर किया गया, जहां ईएनटी विशेषज्ञों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और ऑपरेशन के जरिए गले में फंसा धातु का टुकड़ा निकालकर बच्ची की जान बचाई।
तीन दिन से दर्द में थी मासूम
बसही गांव निवासी चार माह की बच्ची को तीन दिनों से खाने-पीने में परेशानी हो रही थी। दर्द के कारण बच्ची लगातार परेशान और बेचैन थी। परिजनों ने शुरुआत में इसे सामान्य समस्या समझने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया। इस दौरान बच्ची की हालत में सुधार होने के बजाय समस्या बढ़ती गई। जब दर्द और परेशानी ज्यादा बढ़ गई तो परिजन उसे लेकर सीधी के एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे।
निजी अस्पताल में भी नहीं चला कारण का पता
सीधी के निजी नर्सिंग होम में बच्ची को प्रारंभिक उपचार दिया गया। परिजनों के मुताबिक उसे दवा और भाप लेने की सलाह दी गई। लेकिन बच्ची की परेशानी बनी रही। अगले दिन जब उसे एक निजी अस्पताल में ले जाकर गले का एक्स-रे कराया गया तो रिपोर्ट देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए। एक्स-रे में बच्ची की खाने की नली में एक बड़ी वस्तु फंसी दिखाई दी। स्थिति गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने बच्ची को तत्काल रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर कर दिया।
एक्स-रे में दिखा गले में फंसा धातु का टुकड़ा
संजय गांधी अस्पताल पहुंचने पर बच्ची को ईएनटी विभाग में भर्ती किया गया। ईएनटी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार दुबे ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल आवश्यक जांच कराई। अस्पताल के ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र सिंह मौपाची के अनुसार जांच में सामने आया कि बच्ची की खाने की नली में पायल के टुकड़े जैसी धातु की वस्तु फंसी हुई थी। महज चार महीने की बच्ची में इस तरह की वस्तु का फंसना बेहद गंभीर स्थिति थी, क्योंकि इससे खाने-पीने में परेशानी के साथ अन्य जटिलताओं का खतरा भी हो सकता था।
इमरजेंसी ऑपरेशन कर निकाला करीब 2 सेंटीमीटर का टुकड़ा
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने बिना देरी किए ऑपरेशन करने का फैसला लिया। टीम ने रिजिड एसोफैगोस्कॉपी प्रक्रिया के जरिए बच्ची की खाने की नली में फंसे धातु के टुकड़े को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। डॉक्टरों के मुताबिक निकाला गया टुकड़ा लगभग 2 सेंटीमीटर लंबा था। ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत स्थिर बताई गई और उसकी निगरानी की गई। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची अब स्वस्थ है और स्थिति में सुधार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
डॉक्टरों की टीम ने संभाला बेहद चुनौतीपूर्ण मामला
इस जटिल प्रक्रिया में ईएनटी विभाग की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन में सहायक चिकित्सकों के रूप में डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. आकांक्षा, डॉ. दीक्षा, डॉ. गार्गी और डॉ. अनिका शामिल रहीं। वहीं एनेस्थेसिया विभाग से डॉ. कपिल प्रजापति, डॉ. देवयानी, डॉ. अनिता और डॉ. संदीप ने ऑपरेशन के दौरान अपनी सेवाएं दीं। डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने बेहद कम उम्र की बच्ची की स्थिति को देखते हुए सावधानीपूर्वक प्रक्रिया पूरी की।
अंधविश्वास में समय गंवाना पड़ सकता है भारी
यह मामला सिर्फ चिकित्सा सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि समय पर सही इलाज मिलने की अहमियत भी सामने लाता है। बच्ची को तीन दिनों तक परेशानी रही और परिवार झाड़-फूंक में लगा रहा। अगर समय रहते चिकित्सकीय जांच नहीं कराई जाती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। बच्चों में सांस लेने, निगलने या खाने-पीने में अचानक परेशानी, लगातार खांसी, उल्टी, असामान्य बेचैनी या दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के बजाय तुरंत योग्य चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
बच्चों के मामले में एक छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी
मासूम बच्चों के आसपास पायल, सिक्के, छोटे खिलौनों के हिस्से, बटन बैटरी या अन्य छोटी वस्तुएं न छोड़ना बेहद जरूरी है। बच्चे खेलते-खेलते ऐसी वस्तुओं को मुंह में डाल सकते हैं और निगलने या सांस की नली में फंसने का खतरा रहता है।
