Anmol Sandesh News Desk,भोपाल/उज्जैन
वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा नदी परियोजना और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान शिप्रा नदी के नाम को लेकर एक रोचक लेकिन महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसमें मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नदी के वास्तविक नाम के बारे में जानकारी दी।

प्रस्तुतीकरण में लिखा था ‘क्षिप्रा’
बैठक में अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रेजेंटेशन में नदी का नाम ‘क्षिप्रा’ लिखा गया था। इस पर मुख्यमंत्री ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड में नदी का प्रामाणिक और वास्तविक नाम ‘शिप्रा’ ही लिखा जाना चाहिए।
AI का हवाला देने पर सीएम ने दी यह सलाह
जब अधिकारियों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंटरनेट के कई स्रोतों में नदी का नाम ‘क्षिप्रा’ भी दर्ज है, तो मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल AI या इंटरनेट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को महाकवि कालिदास के ग्रंथ ‘मेघदूतम्’, ‘रघुवंश’ तथा वैदिक साहित्य का अध्ययन करने की सलाह दी, जहां नदी का उल्लेख उसके मूल नाम ‘शिप्रा’ के रूप में मिलता है।
दोबारा जांच में AI ने भी माना ‘शिप्रा’ सही
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों ने AI के माध्यम से दोबारा जानकारी की पुष्टि की। पुनः जांच में AI ने भी स्वीकार किया कि नदी का मूल और ऐतिहासिक नाम ‘शिप्रा’ ही है तथा पहले दी गई जानकारी पूरी तरह सटीक नहीं थी।
मुख्यमंत्री ने समझाया दोनों शब्दों का अर्थ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक में बताया कि ‘क्षिप्र’ शब्द का अर्थ होता है तेज गति से चलने वाला, जबकि ‘शिप्रा’ का अर्थ शांत, सौम्य और सहज प्रवाह वाली नदी होता है। उन्होंने कहा कि उज्जैन की यह पवित्र नदी अपने शांत स्वभाव और आध्यात्मिक महत्व के लिए जानी जाती है।
प्राचीन ग्रंथों में भी ‘शिप्रा’ का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने बताया कि वैदिक और संस्कृत साहित्य में भी नदी का उल्लेख ‘शिप्रा’ नाम से मिलता है।
- यजुर्वेद में ‘शिप्रे:’ का उल्लेख मिलता है।
- महाकवि कालिदास के रघुवंश में ‘शिप्रातरंगानिलकम्पितासु‘ का वर्णन किया गया है।
- वहीं मेघदूतम् में ‘शिप्रावातः प्रियतम इव प्रार्थनाचाटुकारः‘ के माध्यम से शिप्रा नदी से आने वाली शीतल और पवित्र वायु का सुंदर चित्रण किया गया है।
सिंहस्थ की तैयारियों पर भी हुई समीक्षा
बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ-2028 से जुड़े विकास कार्यों, नर्मदा-शिप्रा परियोजना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी निर्माण कार्य तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरा करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखने वाले विषयों में प्रमाणिक स्रोतों का पालन किया जाना चाहिए और सरकारी अभिलेखों में ‘शिप्रा’ नाम का ही उपयोग किया जाए।
