Thursday, August 20, 2026
Homeअन्य राज्यसिंहस्थ 2028 की महा-तैयारी, उज्जैन में ₹945 करोड़ का 5.30 KM एलिवेटेड...

सिंहस्थ 2028 की महा-तैयारी, उज्जैन में ₹945 करोड़ का 5.30 KM एलिवेटेड कॉरिडोर, जाम से मिलेगी बड़ी राहत !

Anmol Sandesh News Desk, उज्जैन

दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल सिंहस्थ-2028 को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए उज्जैन के ट्रैफिक सिस्टम को मजबूत करने के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को ₹945 करोड़ 20 लाख की लागत से बनने वाले 5.30 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमिपूजन किया। परियोजना का उद्देश्य उज्जैन के व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक दबाव कम करना और सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाना है।

सिंहस्थ से पहले ट्रैफिक को मिलेगा ‘ऊपर वाला रास्ता’

उज्जैन में महाकाल दर्शन और सिंहस्थ के दौरान शहर में लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है। ऐसे में सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ने से कई इलाकों में जाम की स्थिति बन सकती है। नया एलिवेटेड कॉरिडोर शहर के प्रमुख ट्रैफिक पॉइंट्स को जोड़ते हुए एक वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध कराने में मदद करेगा।इसका फायदा सिर्फ स्थानीय लोगों को ही नहीं, बल्कि महाकाल मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी मिलने की उम्मीद है।

₹945.20 करोड़ की परियोजना, 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य

इस एलिवेटेड कॉरिडोर पर करीब ₹945 करोड़ 20 लाख खर्च किए जाएंगे। परियोजना का निर्माण उदयपुर की रवि इन्फ्राबिल्ड लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। निर्माण के लिए 18 महीने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। यानी सिंहस्थ-2028 से पहले इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

5.30 KM का पूरा कॉरिडोर दो हिस्सों में बनेगा

पूरे एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 5.30 किलोमीटर होगी। इसे दो प्रमुख हिस्सों में विकसित किया जाएगा।

1. चिमनगंज मंडी से हरिफाटक तक

पहला हिस्सा करीब 3.536 किलोमीटर लंबा और चार लेन का होगा।

यह कॉरिडोर—

चिमनगंज मंडी क्षेत्र → इंदौर गेट के ऊपर से → हरिफाटक फ्लाईओवर

तक जाएगा।यह हिस्सा शहर के व्यस्त ट्रैफिक को ऊपर से निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

2. इंदौर गेट से निकास चौराहा

दूसरा हिस्सा करीब 1.732 किलोमीटर लंबा और दो लेन का एलिवेटेड फ्लाईओवर होगा।यह इंदौर गेट से निकास चौराहे तक बनाया जाएगा।दोनों हिस्सों को मिलाकर कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 5.30 किलोमीटर होगी।

इंदौर गेट पर बनेगा सबसे खास एलिवेटेड जंक्शन

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इंदौर गेट पर बनने वाला एलिवेटेड जंक्शन होगा।

यह जंक्शन लगभग—

*  10 मीटर ऊंचा
* 40 मीटर चौड़ा

होगा।यहां ट्रैफिक को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने और अलग-अलग दिशाओं से आने-जाने वाले वाहनों को सुगम रास्ता देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

महाकाल जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी राहत

उज्जैन में सिंहस्थ के अलावा सालभर महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।महाकाल दर्शन के लिए आने वाले लोगों के वाहनों का दबाव भी शहर के प्रमुख मार्गों पर रहता है। ऐसे में एलिवेटेड कॉरिडोर को वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।सिंहस्थ के दौरान जब शहर में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक भीड़ होगी, तब यह कॉरिडोर ट्रैफिक मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सिर्फ सड़क नहीं, आपदा प्रबंधन पर भी फोकस

एलिवेटेड कॉरिडोर के भूमिपूजन कार्यक्रम के साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने होमगार्ड, आपदा मित्र और सिविल डिफेंस वालंटियर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया।मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण के दौरान इस्तेमाल होने वाले आपदा प्रबंधन उपकरणों और बचाव संसाधनों का अवलोकन किया।इन प्रशिक्षित लोगों को बाढ़, आगजनी, भवन दुर्घटना और सड़क हादसे जैसी आपात परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों के लिए तैयार किया जाएगा।

सिंहस्थ के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन क्यों जरूरी?

सिंहस्थ-2028 में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की उम्मीद है।इतने बड़े आयोजन में सिर्फ सड़क, पार्किंग और पुल जैसी सुविधाएं ही जरूरी नहीं हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।इसी वजह से होमगार्ड, आपदा मित्र और सिविल डिफेंस वालंटियर्स को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना को सिंहस्थ की तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

सिंहस्थ 2028 से पहले बदल रहा उज्जैन

सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में सड़क, यातायात, बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन से जुड़े कई स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं। ₹945.20 करोड़ का यह एलिवेटेड कॉरिडोर उसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक नजर में पूरा प्रोजेक्ट

* लागत: ₹945.20 करोड़
* कुल लंबाई: करीब 5.30 KM
* पहला कॉरिडोर: 3.536 KM, 4 लेन
* दूसरा फ्लाईओवर: 1.732 KM, 2 लेन
* इंदौर गेट जंक्शन: करीब 10 मीटर ऊंचा, 40 मीटर चौड़ा
* निर्माण अवधि: 18 महीने
* निर्माण एजेंसी: रवि इन्फ्राबिल्ड लिमिटेड
* मुख्य उद्देश्य: ट्रैफिक कम करना और श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्ग देना

अब नजर निर्माण की रफ्तार पर

सिंहस्थ-2028 से पहले इस परियोजना को पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती भी होगी। 18 महीने की समय-सीमा में काम पूरा होने पर उज्जैन के ट्रैफिक नेटवर्क को बड़ा फायदा मिल सकता है।यानी सिंहस्थ से पहले उज्जैन सिर्फ धार्मिक आयोजन के लिए नहीं, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव के लिए भी तैयार हो रहा है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular