Anmol Sandesh News Desk,वॉशिंगटन/नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का फैसला लिया गया है।इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कम होने से निवेशकों ने राहत की सांस ली है।
107 दिन बाद शांति समझौते पर सहमति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 107 दिनों तक चले तनाव और सैन्य गतिविधियों के बाद अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर सहमति जताई है। समझौते की खबर सामने आते ही वैश्विक कमोडिटी बाजार में हलचल बढ़ गई।ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क और बाधा के खोला जाएगा तथा अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

4 प्रतिशत से ज्यादा टूटा कच्चा तेल
शांति समझौते और होर्मुज मार्ग खुलने की संभावना के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार आंकड़ों के अनुसार, क्रूड ऑयल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है और कीमत करीब 81.15 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध और आपूर्ति संकट की आशंका खत्म होने से तेल बाजार में दबाव कम हुआ है, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियां आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, कर संरचना, परिवहन लागत और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखकर कीमतों पर फैसला करती हैं।हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

आम लोगों की उम्मीदें बढ़ीं
पिछले कुछ समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद लोगों को उम्मीद है कि तेल विपणन कंपनियां जल्द राहत दे सकती हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार स्थिर रहता है और होर्मुज मार्ग पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होता है, तो इसका सकारात्मक असर भारत समेत कई देशों के ईंधन बाजार पर देखने को मिल सकता है।
तेल बाजार पर रहेगी नजर
फिलहाल निवेशकों, तेल कंपनियों और आम उपभोक्ताओं की नजर अमेरिका-ईरान समझौते के क्रियान्वयन और वैश्विक तेल बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलती है या नहीं।
