Anmol Sandesh News Desk | प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
Kasari Masari Name Change: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कसारी-मसारी इलाके को नई पहचान देने का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस क्षेत्र का नाम बदलकर कृष्णपुरी करने की घोषणा की। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने माफिया अतीक अहमद के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के लिए आवासीय परियोजना का भूमि पूजन भी किया। इस परियोजना के तहत यहां 602 फ्लैट बनाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल अब आम लोगों के कल्याण और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।
कसारी-मसारी बनेगा कृष्णपुरी, CM योगी ने किया ऐलान
प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके का नाम बदलकर कृष्णपुरी रखने की घोषणा के बाद यह क्षेत्र चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पहल को क्षेत्र की नई पहचान और विकास से जोड़कर पेश किया।
नाम बदलने की मांग पूर्व कैबिनेट मंत्री और शहर पश्चिमी के विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह ने उठाई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से क्षेत्र का नाम भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर रखने का आग्रह किया था।
इस घोषणा के बाद अब नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया और संबंधित सरकारी अधिसूचना की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही नाम परिवर्तन की प्रशासनिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
अतीक अहमद से मुक्त कराई गई जमीन पर बनेंगे 602 फ्लैट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कसारी-मसारी क्षेत्र में पद्मलोक अपार्टमेंट परियोजना का भूमि पूजन किया। इस आवासीय योजना को प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) पूरा करेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परियोजना पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
परियोजना के तहत कुल 602 फ्लैट बनाए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद और गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के साथ शहरी क्षेत्र में आवासीय सुविधाओं का विस्तार करना है।
योजना में केवल फ्लैट निर्माण ही नहीं, बल्कि निवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।
आवासीय परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- कुल फ्लैट: 602
- परियोजना का नाम: पद्मलोक अपार्टमेंट
- अनुमानित लागत: करीब 150 करोड़ रुपये
- निर्माण एजेंसी: प्रयागराज विकास प्राधिकरण
- प्रस्तावित सुविधाएं: पार्किंग, सोलर सिस्टम और वर्षा जल संचयन
इस परियोजना के पूरा होने पर क्षेत्र में आवासीय सुविधाओं का विस्तार होने और पात्र परिवारों को घर उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
माफिया के कब्जे से मुक्त जमीन का जनहित में इस्तेमाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकार का उद्देश्य माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन का इस्तेमाल जनहित में करना है। सरकार इस तरह की जमीन पर विकास कार्यों और गरीबों के लिए आवासीय सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कहती रही है।
प्रयागराज में अतीक अहमद का नाम लंबे समय तक अपराध और दबदबे से जुड़ी खबरों में सामने आता रहा। ऐसे में इस जमीन पर आवासीय परियोजना शुरू होने को सरकार कानून का राज स्थापित करने और सार्वजनिक हित में संसाधनों के उपयोग के उदाहरण के रूप में पेश कर रही है।
इस परियोजना का वास्तविक लाभ पात्र लाभार्थियों के चयन, फ्लैटों के आवंटन और निर्माण कार्य समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगा।
सिद्धार्थनाथ सिंह ने की थी कृष्णपुरी नाम रखने की मांग
कसारी-मसारी का नाम बदलने का प्रस्ताव पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह की ओर से उठाया गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस इलाके का नाम भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर रखने का अनुरोध किया था।
अब मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, नाम परिवर्तन की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित सरकारी आदेश और अधिसूचना से स्पष्ट होगी।
योगी आदित्यनाथ ने माफिया और कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की नीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद अपराधियों और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की नीति अपनाई गई।
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पहले प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके सहयोगियों का दबदबा था, जबकि अब सरकार कानून का राज स्थापित करने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार की प्राथमिकता आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।
प्रयागराज में विकास और नई पहचान पर जोर
कसारी-मसारी का नाम कृष्णपुरी रखने की घोषणा और पद्मलोक अपार्टमेंट परियोजना का भूमि पूजन, दोनों ही घटनाक्रम प्रयागराज में चर्चा का विषय हैं। एक ओर नाम परिवर्तन के जरिए क्षेत्र को नई पहचान देने की बात कही गई है, तो दूसरी ओर आवासीय परियोजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
