Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
Asian Games 2026: जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट सावन बरवाल ने इतिहास रच दिया है। पुरुषों की मैराथन में उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस पदक के साथ ही एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत का 44 साल का पदक सूखा खत्म हो गया। जापान के इचिटाका यामाशिता ने 2:10:49 के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि चीन के फेंग पेइयू ने 2:12:13 के समय के साथ ब्रॉन्ज हासिल किया। सावन की इस उपलब्धि ने उन्हें एशियन गेम्स मैराथन में पदक जीतने वाला भारत का चौथा पुरुष धावक बना दिया है।
44 साल बाद मैराथन में भारत की वापसी
एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत ने इससे पहले 1982 में पदक जीता था। दिल्ली में हुए उस एशियन गेम्स में एच.के. सीताराम ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। इससे पहले 1951 में छोटा सिंह ने गोल्ड और सुरत सिंह माथुर ने ब्रॉन्ज जीता था। अब 2026 में सावन बरवाल ने सिल्वर जीतकर 44 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया है। खास बात यह भी है कि भारत को पुरुष मैराथन का पिछला पदक देश की जमीन पर मिला था, जबकि सावन ने विदेशी धरती पर यह उपलब्धि हासिल की है।
कौन हैं सावन बरवाल?
सावन बरवाल हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं और भारतीय सेना में कार्यरत हैं। उनका जन्म 18 फरवरी 1998 को हुआ था और विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड के मुताबिक उनकी उम्र 28 वर्ष है। वह मूल रूप से लंबी दूरी के धावक हैं और 5000 मीटर तथा 10,000 मीटर जैसी ट्रैक स्पर्धाओं में भी हिस्सा ले चुके हैं। सावन का मैराथन सफर बहुत पुराना नहीं है। दरअसल, 2026 में ही उन्होंने अपना पहला प्रतिस्पर्धी मैराथन दौड़ा था। इससे पहले उनका करियर मुख्य रूप से ट्रैक इवेंट्स पर केंद्रित रहा था। कोचों ने उनकी सहनशक्ति को देखते हुए उन्हें मैराथन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
2026 में तोड़ा 48 साल पुराना रिकॉर्ड
एशियन गेम्स से पहले ही सावन बरवाल ने भारतीय एथलेटिक्स में बड़ी पहचान बना ली थी। 12 अप्रैल 2026 को रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय निकाला। इसके साथ ही उन्होंने महान धावक शिवनाथ सिंह का 1978 से चला आ रहा 2:12:00 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह रिकॉर्ड करीब 48 साल तक कायम रहा था। रॉटरडैम उनका पहला प्रतिस्पर्धी मैराथन था और उसी प्रदर्शन के जरिए उन्होंने एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई किया। अब एशियन गेम्स में 2:11:37 का समय निकालकर सावन ने इसी साल बनाए अपने राष्ट्रीय रिकॉर्ड में भी सुधार किया है।
मैराथन में कैसे बनाई बढ़त?
एशियन गेम्स की रेस में सावन शुरुआत से ही अग्रणी समूह में बने रहे। शुरुआती किलोमीटरों में वह शीर्ष धावकों के साथ दौड़ते रहे और रेस के मध्य तक जापान के यामाशिता के साथ उनकी कड़ी टक्कर दिखाई दी। करीब 35 किलोमीटर तक दोनों धावक पदक की दौड़ में मजबूती से बने हुए थे। अंतिम चरण में यामाशिता ने गति बढ़ाकर बढ़त बना ली, लेकिन सावन ने अपनी रफ्तार बनाए रखी और सिल्वर मेडल सुनिश्चित किया।
चोट के बाद वापसी और फिर इतिहास
सावन के करियर में मुश्किल दौर भी आया। भारत आने वाली बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के दौरान चोट के कारण उन्हें प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से दूरी बनानी पड़ी थी। इसके बावजूद उन्होंने वापसी की और 2026 में मैराथन में उतरने का फैसला किया। पहले ही मैराथन में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ना और उसके कुछ महीनों बाद एशियन गेम्स में सिल्वर जीतना उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है।
साधारण शुरुआत से एशियन गेम्स पोडियम तक
सावन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एथलेटिक्स में प्रवेश किसी बड़े बचपन के लक्ष्य के साथ नहीं किया था। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने बताया था कि स्कूल के दिनों में एथलेटिक्स से उनका जुड़ाव लगभग संयोग से हुआ और प्रदर्शन अच्छा आने के बाद उन्होंने इसे जारी रखा। 2019 में सेना में शामिल होने के बाद उन्हें खेल को पेशेवर रूप से आगे बढ़ाने का बेहतर माहौल मिला। धीरे-धीरे लंबी दूरी की दौड़ में उनका प्रदर्शन बेहतर होता गया और वह राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख धावकों में शामिल हो गए।
भारत के लिए ऐतिहासिक पल
सावन बरवाल का सिल्वर सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय पुरुष मैराथन के लिए भी महत्वपूर्ण पड़ाव है। 44 साल बाद एशियन गेम्स में भारत को पुरुष मैराथन का पदक मिला है। 1951 में छोटा सिंह और सुरत सिंह माथुर, 1982 में एच.के. सीताराम और अब 2026 में सावन बरवाल—इन चार नामों के साथ एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत के पदक विजेताओं की सूची आगे बढ़ी है।
सावन बरवाल की बड़ी उपलब्धियां
- एशियन गेम्स 2026: पुरुष मैराथन में सिल्वर
- एशियन गेम्स टाइम: 2:11:37
- भारत का पहला एशियन गेम्स मैराथन पदक: 44 साल बाद
- रॉटरडैम मैराथन 2026: 2:11:58
- 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड: शिवनाथ सिंह का रिकॉर्ड तोड़ा
- भारतीय सेना: सेना के एथलीट के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
- एशियन गेम्स मैराथन: भारत के चौथे पुरुष पदक विजेता
