Anmol Sandesh News Desk, उज्जैन
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण के लिए नगर निगम की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है। इससे प्रशासन के लिए प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण का काम आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
सुबह कार्रवाई के दौरान बिगड़े हालात
हाईकोर्ट के फैसले से पहले सोमवार सुबह शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। विरोध के बीच पुलिस पर पथराव किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। स्थिति को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। बाद में दोबारा पथराव की घटना सामने आने पर पुलिस ने फिर आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए कार्रवाई जारी रखी। नमाज के समय कार्रवाई रोकने की भी जानकारी सामने आई।
15 मीटर चौड़ी होनी है सड़क
पूरा विवाद कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है। प्रशासन और नगर निगम की योजना के तहत इस मार्ग को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। यह मार्ग गोपाल मंदिर, महाकाल मंदिर और आगे शिप्रा नदी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है और सिंहस्थ 2028 के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए इसका चौड़ीकरण किया जा रहा है। हाईकोर्ट के 9 सितंबर के आदेश में भी सड़क चौड़ीकरण को 15 मीटर करने और संबंधित हिस्से को बाधक बताए जाने का उल्लेख है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, करीब डेढ़ किलोमीटर के इस मार्ग पर सड़क की निर्धारित सीमा में आने वाले कई निर्माण हटाए जा चुके हैं। मस्जिद का जो हिस्सा सड़क की सीमा में आ रहा है, उसी को हटाने को लेकर विवाद है।
मस्जिद का कितना हिस्सा हटाया जा रहा?
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण की प्रस्तावित कार्रवाई से मस्जिद के प्रार्थना स्थल, मीनार और सामने के मजहर चौक का कुछ हिस्सा प्रभावित होने की बात याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने रखी थी। वहीं प्रशासन का पक्ष रहा कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद का छोटा हिस्सा हटाना आवश्यक है और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
600 साल पुरानी होने का दावा
मस्जिद की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने मस्जिद के करीब 636 साल पुरानी होने का दावा किया है और इसका निर्माण 1390 के आसपास का बताया है। दूसरी ओर, उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मस्जिद के 100 साल से अधिक पुरानी होने की बात सामने आई है। इसलिए मस्जिद की वास्तविक ऐतिहासिक उम्र को लेकर दावे और दस्तावेज अलग-अलग हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को भी मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज की थीं। अदालत के आदेश में कहा गया कि 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए संबंधित हिस्से को हटाने की कार्रवाई में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि नगर निगम ने संबंधित पक्षों को आपत्ति रखने और सुनवाई का अवसर दिया था। अदालत के आदेश में सड़क चौड़ीकरण को शहर में यातायात और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान आवाजाही से जोड़ते हुए सार्वजनिक हित का मुद्दा भी माना गया।
पुलिस कार्रवाई और FIR
विरोध के दौरान पथराव और पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में कई लोगों को हिरासत में लिए जाने और FIR दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में FIR और हिरासत की संख्या को लेकर अंतर है, इसलिए पुलिस की आधिकारिक केस डायरी/अंतिम जानकारी के आधार पर संख्या में बदलाव संभव है। कुछ रिपोर्टों में सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज होने की बात कही गई है।
सिंहस्थ 2028 के लिए हो रहा सड़क चौड़ीकरण
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कई प्रमुख मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर करने के लिए सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के काम किए जा रहे हैं। शाही मस्जिद का मामला इसी सड़क चौड़ीकरण योजना से जुड़ा
