Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के प्रमुख घटक हैं। दोनों दल 2024 लोकसभा चुनाव साथ लड़ चुके हैं और अब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तय करने की कवायद चल रही है। हालांकि, अभी तक दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग पर अंतिम सहमति नहीं बनी है।
दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक, सीट शेयरिंग पर नजर
INDIA ब्लॉक की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में होने वाली है। बैठक में विपक्षी दलों के नेता शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव और विपक्षी दलों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा की उम्मीद है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद बैठक में शामिल नहीं होंगे और उनकी ओर से पार्टी का प्रतिनिधि हिस्सा लेगा। इस बैठक के दौरान सपा और कांग्रेस के बीच यूपी में सीट बंटवारे को लेकर चल रही बातचीत पर भी नजर रहेगी। दोनों दलों के बीच पिछले कुछ दिनों में सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी हुई है, जिसके बाद सीट शेयरिंग का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है।
अखिलेश की शर्त—सिर्फ सीट नहीं, उम्मीदवार भी अहम
सपा की ओर से सीट शेयरिंग को लेकर जो रुख सामने आया है, उसमें सिर्फ सीट मांगने के बजाय उस सीट पर संभावित उम्मीदवार और उसकी राजनीतिक पकड़ को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अखिलेश यादव ने संकेत दिया है कि गठबंधन में सीटों का निर्धारण ‘जीतने की क्षमता’ यानी विनेबिलिटी के आधार पर होना चाहिए। यानी कांग्रेस जिन सीटों पर दावा करती है, वहां उसके संभावित उम्मीदवार और जमीनी स्थिति को भी देखा जा सकता है। इसी वजह से सपा कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों की सूची और संबंधित सीटों पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट करने को कह सकती है। कई सीटों पर दोनों दलों की दावेदारी होने की वजह से बातचीत आसान नहीं मानी जा रही है।
कांग्रेस का 150 सीटों से कम पर समझौता नहीं?
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी यूपी में अपने लिए बड़ा सीट शेयर मांगने के संकेत दिए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि सीट शेयरिंग अक्टूबर में अंतिम रूप ले सकती है और कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के पास सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार उपलब्ध हैं। यही मांग सपा और कांग्रेस के बीच बातचीत का सबसे अहम बिंदु बन सकती है। कांग्रेस जहां अपने संगठन और 2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर अधिक सीटों की दावेदारी कर रही है, वहीं सपा सीटों के बंटवारे में अपने संगठनात्मक आधार और उम्मीदवार की जीतने की क्षमता को प्रमुख आधार बनाने की बात कर रही है।
2024 में साथ लड़े थे चुनाव
सपा और कांग्रेस ने 2024 लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत लड़ा था। दोनों दलों ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 सीटें जीती थीं—सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं। अब 2027 का विधानसभा चुनाव दोनों दलों के लिए अलग समीकरण लेकर आएगा। उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और इसी वजह से सीट शेयरिंग का फॉर्मूला गठबंधन की चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा है।
दोनों दलों के बीच बयानबाजी भी बढ़ी
सीट शेयरिंग को लेकर पिछले दिनों सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी भी देखने को मिली। कांग्रेस की ओर से अधिक सीटों की मांग और सपा की ओर से उम्मीदवार की जमीनी स्थिति पर जोर दिए जाने के बीच दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। अखिलेश यादव ने हालांकि गठबंधन को लेकर सार्वजनिक रूप से कहा है कि दोनों दल साथ हैं। लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत अभी जारी है।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सपा और कांग्रेस के बीच कितनी सीटों पर सहमति बनती है और किन सीटों पर किस पार्टी का उम्मीदवार उतरेगा। कांग्रेस अक्टूबर तक सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने की उम्मीद जता रही है, जबकि सपा की ओर से सीट के साथ उम्मीदवार की क्षमता और जमीनी आधार को भी अहम बताया जा रहा है।
