Thursday, October 8, 2026
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RBI Repo Rate Hike: होम-कार लोन वालों को झटका, RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया

Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई के बढ़ते जोखिम के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। अक्टूबर 2026 की MPC बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। रेपो रेट बढ़ने का असर बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। खास तौर पर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य कर्जों की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने पर EMI का बोझ बढ़ सकता है। हालांकि, किसी ग्राहक की EMI कितनी बढ़ेगी, यह उसके बैंक, लोन के प्रकार, बकाया रकम, ब्याज दर और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा।

महंगाई को लेकर RBI की चिंता

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई MPC बैठक में ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के जोखिम पर चर्चा हुई। RBI ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार व्यापक और मजबूत बनी हुई है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। वहीं, अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन करीब 5.8% रहने का अनुमान है। कोर महंगाई का अनुमान 4.4% रखा गया है। महंगाई के जोखिमों में कमजोर मानसून, अल नीनो की स्थिति, ऊर्जा और कमोडिटी की ऊंची कीमतें तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं शामिल हैं। RBI के मुताबिक इन कारकों का असर आने वाले समय में कीमतों पर पड़ सकता है।

अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर RBI का भरोसा

रेपो रेट बढ़ाने के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% कर दिया है। पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही थी, जिसे मजबूत घरेलू खपत, निवेश और निर्यात से समर्थन मिला। RBI ने अपनी नीति का रुख भी ‘Calibrated Tightening’ यानी चरणबद्ध सख्ती की ओर बदला है। इसका संकेत है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई को लेकर ज्यादा सतर्क है और आगे के फैसले महंगाई तथा आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे।

क्या होता है Repo Rate?

रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्प अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए RBI से उधार लेना महंगा हो सकता है। इसका असर आगे चलकर बैंक की लोन ब्याज दरों पर पड़ सकता है। इसी वजह से रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग-रेट कर्जों की EMI पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका पूरा असर बैंक की ब्याज दर और ग्राहक के लोन एग्रीमेंट पर निर्भर करता है।

अब लोन लेने वालों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर बैंक रेपो रेट बढ़ोतरी का पूरा या कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो नए लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है। मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन में भी EMI बढ़ने या लोन की अवधि बढ़ने की संभावना हो सकती है। वहीं, जिन ग्राहकों के लोन की ब्याज दर फिक्स्ड है, उन पर तत्काल प्रभाव जरूरी नहीं है। इसलिए लोन लेने वालों को अपने बैंक से नई ब्याज दर और EMI पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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