Anmol Sandesh News Desk, वाशिंगटन।
US Midterm Elections: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। कई अहम सीटों पर डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद अमेरिकी राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनावी नतीजों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। ट्रंप ने अपनी पहचान बन चुकी लाल रंग की टोपी की तस्वीर पोस्ट की, जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘VETO’ लिखा हुआ है। इस पोस्ट को डेमोक्रेट्स के लिए सीधी राजनीतिक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल कर रिपब्लिकन खेमे को बड़ा झटका दिया है। खास बात यह है कि डेमोक्रेट्स ने उन क्षेत्रों में भी अपनी स्थिति मजबूत की है, जिन्हें लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इन नतीजों से कांग्रेस में राजनीतिक समीकरण बदलने और ट्रंप प्रशासन के लिए विधायी फैसले लेना चुनौतीपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है।
चुनाव परिणामों के बाद ट्रंप की ‘VETO’ लिखी टोपी वाली पोस्ट को इसी बदलते राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ने इस संदेश के जरिए डेमोक्रेट्स को यह बताने की कोशिश की है कि भले ही विपक्ष चुनाव में मजबूत होकर उभरा हो, लेकिन राष्ट्रपति के पास भी ऐसे संवैधानिक अधिकार हैं, जिनका इस्तेमाल वह अपनी नीतियों के खिलाफ आने वाले विधेयकों को रोकने के लिए कर सकते हैं।
ट्रंप का दावा- मैं चुनाव लड़ता तो रिपब्लिकन पार्टी की होती बड़ी जीत
चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी लोकप्रियता का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर वह खुद चुनावी मैदान में होते और उनका नाम बैलेट पेपर पर होता, तो रिपब्लिकन पार्टी को कहीं बड़ी जीत हासिल होती। ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी गैरमौजूदगी का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा है।
हालांकि, चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई है। लेकिन उनकी ‘VETO’ वाली पोस्ट ने सहयोग के संकेतों के बीच राजनीतिक टकराव की संभावनाओं को भी उजागर कर दिया है।
क्या है VETO का मतलब, ट्रंप कैसे रोक सकते हैं विपक्ष के बिल?
अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित विधेयकों पर वीटो लगाने का अधिकार प्राप्त है। आसान भाषा में समझें तो यदि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदन किसी विधेयक को पारित कर राष्ट्रपति के पास भेजते हैं और राष्ट्रपति उससे सहमत नहीं होते, तो वह उस विधेयक को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। इसी संवैधानिक शक्ति को ‘वीटो पावर’ कहा जाता है।
ट्रंप पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी ऐसे विधेयक लाती है, जो उनकी नीतियों और राजनीतिक एजेंडे के खिलाफ होंगे, तो वह उन्हें वीटो कर सकते हैं। ऐसे में लाल टोपी पर लिखा ‘VETO’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि विपक्ष के साथ संभावित राजनीतिक संघर्ष का संकेत माना जा रहा है।
कांग्रेस के पास भी है ट्रंप के वीटो को पलटने का अधिकार
हालांकि, अमेरिकी व्यवस्था में राष्ट्रपति की वीटो शक्ति असीमित नहीं है। अमेरिकी कांग्रेस के पास राष्ट्रपति के वीटो को पलटने का संवैधानिक अधिकार भी है। इसके लिए प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate) दोनों में दो-तिहाई बहुमत से विधेयक को दोबारा पारित करना जरूरी होता है।
लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों सदनों में इतना बड़ा समर्थन जुटाना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि ट्रंप की वीटो वाली पोस्ट को आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच संभावित टकराव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका की राजनीति में बढ़ेगी खींचतान?
मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने अमेरिकी राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच संघर्ष की नई जमीन तैयार कर दी है। एक तरफ डेमोक्रेट्स चुनावी सफलता के बाद अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश करेंगे, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप अपने संवैधानिक अधिकारों और राष्ट्रपति पद की शक्तियों के जरिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप और डेमोक्रेट्स मिलकर काम करेंगे या फिर अमेरिकी कांग्रेस में विधेयकों को लेकर टकराव और बढ़ेगा? फिलहाल ट्रंप की लाल टोपी पर लिखा एक शब्द ‘VETO’ अमेरिकी राजनीति में नई बहस का विषय बन गया है।
