Anmol Sandesh News Desk,अयोध्या
अयोध्या स्थित राम मंदिर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार विवाद मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे आरोपों के कारण सामने आया है। मामले ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है।ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai के कुछ बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राम मंदिर पूरे सनातन समाज की आस्था का केंद्र है और इसे किसी एक संप्रदाय तक सीमित नहीं किया जा सकता।
मंदिर सभी सनातन परंपराओं का केंद्र: शंकराचार्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर शैव, वैष्णव, शाक्त, संन्यासी सहित सभी सनातन परंपराओं के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों में कई प्रमुख संतों और परंपराओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।उनका कहना है कि राम जन्मभूमि आंदोलन में योगदान देने वाले कई संतों और धार्मिक परंपराओं से आवश्यक परामर्श नहीं लिया गया, जिससे असंतोष की स्थिति बनी है।
किस बयान पर शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत उस बयान को लेकर बताई जा रही है, जिसमें राम मंदिर को रामानंद संप्रदाय से जोड़कर देखे जाने की चर्चा हुई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं के सहयोग और दान से बने मंदिर को किसी एक संप्रदाय की पहचान तक सीमित करना उचित नहीं होगा।
चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों से बढ़ी हलचल
इस बीच समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री Pawan Pandey ने दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता हुई है। हालांकि इन आरोपों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा है कि अब तक ऐसी किसी वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है और आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
जांच की मांग तेज
मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से जांच की मांग उठाई जा रही है। वहीं ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर से जुड़े सभी वित्तीय कार्य निर्धारित प्रक्रिया और पारदर्शिता के साथ संचालित किए जा रहे हैं।फिलहाल आरोप-प्रत्यारोपों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें संभावित जांच तथा आधिकारिक तथ्यों पर टिकी हैं।
