Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली/कोलकाता/अगरतला
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका सामने आया है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने टीएमसी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान कर दिया है।इस फैसले की घोषणा टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने की। उन्होंने कहा कि नया समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ मिलकर काम करेगा। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में NCPI को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है NCPI?
NCPI यानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक पार्टी है। इसका गठन 20 जनवरी 2023 को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया था। पार्टी अभी पांच साल भी पूरी नहीं कर पाई है, लेकिन अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है।यह पार्टी चुनाव आयोग में पंजीकृत है, लेकिन अभी तक इसे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा नहीं मिला है।

बंगाल में रजिस्ट्रेशन, त्रिपुरा में सक्रियता
हालांकि पार्टी का पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में स्थित है, लेकिन इसकी राजनीतिक गतिविधियां मुख्य रूप से त्रिपुरा में केंद्रित रही हैं।पार्टी के दस्तावेजों के अनुसार, शेली कुंडू कोषाध्यक्ष हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व में उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती रही है।पार्टी का प्रमुख नारा रहा है-“अपने अधिकार बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें, राजनीतिक हस्तियों नहीं बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन करें।”
पहला चुनाव और शुरुआती संघर्ष
NCPI ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2023 में लड़ा था। पार्टी ने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन चार उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज हो गए थे।अंततः पार्टी केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ सकी, लेकिन किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई। चुनावी राजनीति में उसकी उपस्थिति बेहद सीमित रही।
आर्थिक और राजनीतिक स्थिति
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक कुल लगभग 1.13 लाख रुपये का चंदा प्राप्त हुआ है। पार्टी के पास न कोई विधायक था और न ही कोई सांसद।यानी कुछ समय पहले तक यह पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में लगभग अज्ञात थी।

जीरो सांसद से सीधे 20 सांसद तक
टीएमसी के 20 सांसदों के समर्थन के बाद NCPI की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल गई है। पहली बार पार्टी को संसद में बड़ा प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है।टीएमसी से अलग हुए सांसदों के समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की है।यदि यह विलय औपचारिक रूप से मान्य होता है, तो NCPI संसद में एक प्रभावशाली राजनीतिक समूह के रूप में उभर सकती है।
बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के दो-तिहाई सांसदों का अलग होना पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। वहीं NCPI के लिए यह अवसर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का बड़ा मंच साबित हो सकता है।अब सभी की निगाहें लोकसभा सचिवालय, चुनाव आयोग और टीएमसी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हैं।
