Anmol Sandesh News Desk,पेरिस/लंदन/मैड्रिड
यूरोप इस समय पिछले कई दशकों की सबसे भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, जर्मनी और बेल्जियम समेत 26 यूरोपीय देश भीषण हीटवेव की चपेट में हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि फ्रांस में गर्मी और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 58 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक न्यूक्लियर पावर प्लांट को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।

फ्रांस में 58 मौतों से मचा हड़कंप
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग नदियों, झीलों और नहरों में नहाने पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में 40 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर युवा शामिल हैं। वहीं 2 बच्चों समेत 18 लोगों की मौत लू और अत्यधिक गर्मी के कारण हुई है।
न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद करना पड़ा
भीषण गर्मी के चलते फ्रांस के गोलफेश न्यूक्लियर पावर प्लांट को बंद करना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्लांट को ठंडा करने के लिए उपयोग की जाने वाली गारोन नदी का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका थी। ऐसे में प्लांट का संचालन जारी रखना जोखिम भरा माना गया।

26 देशों में हीटवेव, 14 देशों में रेड अलर्ट
यूरोप के 26 देश इस समय गर्मी की चपेट में हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन, ब्रिटेन, जर्मनी और बेल्जियम समेत 14 देशों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। कई क्षेत्रों में तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है।
फ्रांस में शराब पीने पर भी लगी रोक
फ्रांस सरकार ने भीषण गर्मी को देखते हुए कई इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का मानना है कि अत्यधिक गर्मी में शराब का सेवन लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।गर्मी के चलते 1,350 से अधिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, फ्रांस ने हाल ही में 1947 के बाद की सबसे गर्म रात दर्ज की है।

ब्रिटेन में टूट सकता है 50 साल पुराना रिकॉर्ड
ब्रिटेन का मौसम विभाग चेतावनी दे चुका है कि तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा हुआ तो 1976 में बना जून महीने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट जाएगा। मौसम विभाग ने “रेड एक्सट्रीम हीट वार्निंग” जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
स्पेन, जर्मनी और इटली भी बेहाल
- स्पेन के कई शहरों में तापमान 40°C के करीब पहुंच गया है।
- जर्मनी में नदी और झीलों में नहाने के दौरान एक सप्ताह में 5 लोगों की मौत हुई है।
- इटली में रोम और मिलान समेत 15 शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
- बेल्जियम के मौसम वैज्ञानिक इसे देश के इतिहास की सबसे गंभीर हीटवेव बता रहे हैं।
आखिर क्यों पड़ रही है इतनी भीषण गर्मी?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में इस बार “हीट डोम” और “ओमेगा ब्लॉक” जैसी मौसमीय परिस्थितियां एक साथ बनी हुई हैं। इसके कारण गर्म हवा जमीन के ऊपर फंस जाती है और कई दिनों तक तापमान लगातार बढ़ता रहता है।विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और एल नीनो प्रभाव भी इस भीषण गर्मी को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी चरम मौसमीय घटनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं।
यूरोप में AC की कमी भी बनी समस्या
विशेषज्ञों के मुताबिक, यूरोप के केवल 20 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर (AC) हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा करीब 90 प्रतिशत है। यही वजह है कि लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव का असर यूरोपीय देशों में ज्यादा गंभीर रूप से दिखाई देता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों ने लोगों को अधिक पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।यूरोप में इस वक्त हालात ऐसे हैं कि सड़कें तप रही हैं, स्कूल बंद हो रहे हैं और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के सबसे खतरनाक संकेतों में से एक मान रहे हैं।

