Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए गर्व का क्षण उस समय आया जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में दंतेवाड़ा की प्रसिद्ध समाजसेविका डॉ. बुधरी ताती को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। आदिवासी समाज, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक समय तक किए गए उनके अतुलनीय योगदान को यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है।बस्तर के दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समाज सेवा का अलख जगाने वाली बुधरी ताती आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। ग्रामीण महिलाएं उन्हें प्यार से ‘बुआ’ और ‘ताती’ कहकर पुकारती हैं।
कौन हैं डॉ. बुधरी ताती?
डॉ. बुधरी ताती छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हीरानगर क्षेत्र की रहने वाली हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा और आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।साल 1984-85 में मात्र 15 वर्ष की उम्र में उन्हें गुरमगुंडा आश्रम के संत लखमू बाबा से समाज सेवा की प्रेरणा मिली। यही वह दौर था जब उन्होंने तय कर लिया कि उनका जीवन समाज और जरूरतमंद लोगों के लिए समर्पित रहेगा।इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के नागपुर स्थित अखिल भारतीय राष्ट्रीय सेवा समिति में प्रशिक्षण प्राप्त किया और वापस बस्तर लौटकर जनसेवा के मिशन में जुट गईं।

महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
डॉ. बुधरी ताती ने बस्तर के सुदूर गांवों में पहुंचकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का अभियान चलाया।
उन्होंने महिलाओं को—
- सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिलाया,
- स्वरोजगार से जोड़ा,
- स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया,
- आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया।
उनके प्रयासों से हजारों महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर भी किया काम
महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ बुधरी ताती ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।
उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को—
- बच्चों की शिक्षा,
- स्वच्छ जीवनशैली,
- पर्यावरण संरक्षण,
- स्वास्थ्य सेवाओं,
- सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति
के लिए प्रेरित किया।
नशामुक्ति अभियान की बनीं पहचान
बस्तर के कई गांवों में नशाखोरी एक बड़ी सामाजिक समस्या रही है। डॉ. बुधरी ताती ने इसके खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान चलाया।उन्होंने महिलाओं और युवाओं को संगठित कर शराब और अन्य नशे के खिलाफ आंदोलन खड़े किए, जिससे कई गांवों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।

शादी नहीं की, समाज को ही परिवार माना
डॉ. बुधरी ताती के जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया।उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर आदिवासी समाज, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों के कल्याण को अपना मिशन बनाया। यही कारण है कि आज बस्तर के हजारों लोग उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं।
22 पुरस्कारों के बाद मिला पद्मश्री
डॉ. बुधरी ताती को अब तक समाज सेवा के क्षेत्र में 22 विभिन्न पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इनमें तीन राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी शामिल हैं।अब उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है, जो उनके जीवनभर के समर्पण, संघर्ष और सेवा कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान है।
बस्तर के लिए गौरव का क्षण
डॉ. बुधरी ताती को मिला पद्मश्री सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बस्तर, छत्तीसगढ़ और आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि निस्वार्थ सेवा, समर्पण और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से किसी भी व्यक्ति का कार्य राष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकता है।उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को समाज सेवा और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।
