Anmol Sandesh News Desk,उज्जैन
मध्य प्रदेश सरकार ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित “सिंहस्थ 2016 का अनुभव, सिंहस्थ 2028 का संकल्प” कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सिंहस्थ-2016 और पूर्व कुंभ मेलों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा अपने अनुभव साझा किए।मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अब तक का सबसे भव्य, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक आयोजन बनाया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि वर्ष 2028 के सिंहस्थ में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इनमें से लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकते हैं। इतनी विशाल संख्या को देखते हुए सरकार अभी से अधोसंरचना, यातायात, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी व्यवस्थाओं पर तेजी से काम कर रही है।
क्षिप्रा नदी पर बनेंगे 22 नए पुल
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए क्षिप्रा नदी पर 22 नए पुलों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा शहर की प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण, नए घाटों का विकास, पार्किंग, पेयजल, बिजली और यातायात प्रबंधन को भी आधुनिक बनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि पहले क्षिप्रा नदी की धारा मिट्टी के कारण अपना रास्ता बदलती रहती थी, लेकिन अब पक्के घाट बनने से यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो चुकी है।
हर श्रद्धालु को मिलेगी बेहतर सुविधा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार सिंहस्थ में—
- श्रद्धालुओं के ठहरने की बेहतर व्यवस्था होगी।
- धर्मशालाओं का सुव्यवस्थित आवंटन किया जाएगा।
- रेलवे और सड़क नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।
- पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
- सुरक्षा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था रहेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा सिंहस्थ आयोजित करना है, जो पूरी दुनिया के लिए उदाहरण बने।
धार्मिक पर्यटन बना विकास का बड़ा माध्यम
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और उज्जैन सहित मध्य प्रदेश के कई धार्मिक स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। सरकार ऐसे विकास कार्य कर रही है जिनका लाभ लंबे समय तक प्रदेश को मिलेगा।उन्होंने कहा कि “महाकाल की नगरी उज्जैन से जुड़ना अपने आप में सौभाग्य की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है।”


CM ने सुनाया अपना पुराना अनुभव
कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ से जुड़ा एक रोचक संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 1980 के दशक में वे स्काउट-गाइड के सदस्य के रूप में सिंहस्थ में सेवा कर चुके हैं। वहीं वर्ष 1992 में सिंहस्थ समिति का हिस्सा भी रहे।उन्होंने हंसते हुए बताया कि एक बार कार्यालय में एक बुजुर्ग कर्मचारी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया और अंदर जाने से रोक दिया। बाद में काफी समझाने के बाद उन्हें प्रवेश मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अनुभव उन्हें आज भी याद हैं और यही अनुभव भविष्य की बेहतर व्यवस्थाओं में मदद करेंगे।
अधिकारियों के अनुभव का मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार केवल उज्जैन ही नहीं बल्कि प्रदेश और देश के अन्य अनुभवी अधिकारियों को भी सिंहस्थ की तैयारियों में शामिल किया जाएगा, ताकि पूर्व आयोजनों के अनुभवों का अधिकतम लाभ मिल सके।
विश्वस्तरीय सिंहस्थ बनाने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य सिंहस्थ-2028 को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महाकुंभ के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल, स्मार्ट सुरक्षा और आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।
