Anmol Sandesh News Desk,भोपाल
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। यूसीसी के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को तीन खंडों में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट तैयार करने के लिए समिति की अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।अब इस रिपोर्ट को विधि विभाग के पास परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। विभाग आवश्यक कानूनी परीक्षण और संशोधन करेगा। इसके बाद रिपोर्ट वरिष्ठ सचिव समिति के समक्ष रखी जाएगी और फिर मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की मंजूरी के बाद आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने की संभावना है।

तीन खंडों में तैयार हुई अंतिम रिपोर्ट
समिति ने अपनी रिपोर्ट को तीन अलग-अलग भागों में तैयार किया है।
पहला खंड 10 अध्यायों में विभाजित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू कानूनों, सामाजिक परंपराओं और विभिन्न व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए समिति की सिफारिशें शामिल की गई हैं।
दूसरे खंड में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक का प्रारूप दिया गया है। इस प्रारूप में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं। इसे मध्य प्रदेश में वर्तमान में लागू कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
तीसरा खंड जन-परामर्श पर आधारित है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यम से व्यापक सुझाव मांगे थे। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव और परामर्श प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है।
इन अहम विषयों को किया गया शामिल
समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप कानून का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।समिति ने अपनी सिफारिशों में लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों, स्थानीय रीति-रिवाजों के सम्मान और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है।
ST समुदाय को दायरे से बाहर रखने की सिफारिश
समिति ने अपनी प्रमुख अनुशंसाओं में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया है। यह सिफारिश राज्य की जनजातीय परंपराओं और विशेष संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला कदम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समिति की अध्यक्ष सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर का भी आभार व्यक्त किया। दोनों सदस्य व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।अब विधेयक का अंतिम कानूनी परीक्षण पूरा होने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यदि मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलती है, तो आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
